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अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में मंजूर, केंद्र को नोटिस

2Blast News Editor Firoz Siddiqui ,9644670008

नई दिल्ली: संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 एक अस्थाई व्यवस्था थी और इसे खत्म करने के लिए जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा के पुर्नगठन की जरूरत नहीं है। विजय लक्ष्मी झा की तरफ से जारी याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति के आदेश भर से इस अनुच्छेद को खत्म किया जा सकता है।

गौरतलब है कि देश में समय-समय पर जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले इस अनुच्छेद को खत्म किए जाने की मांग उठती रही है। हालांकि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल इस मांग का पुरजोर विरोध करते रहे हैं।

अनुच्छेद 370 और 35 ए को खत्म किए जाने की हालिया मांग को लेकर राज्य की पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार में भी एक राय नहीं है। राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती चेतावनी देते हुए कह चुकी हैं कि यदि राज्य को मिले विशेषाधिकारों में छेड़छाड़ की गई तो वहां कोई तिरंगा थामने वाला भी नहीं होगा।

महबूबा ने कहा, ‘एक ओर हम संविधान के दायरे में कश्मीर समस्या हल करने की बात करते हैं और दूसरी ओर कोड़े मारते हैं।’ इस मसले को लेकर राज्य की विपक्षी पार्टी नैशनल कॉन्फ्रेंस भी एकमत है। नेशनल कॉन्फ्रेंस सुप्रीमो फारुक अब्दुल्ला भी कह चुके हैं कि राज्य को मिले विशेषाधिकारों के साथ छेड़-छाड़ की स्थिति में जनविद्रोह की स्थिति पैदा हो जाएगी।⁠⁠⁠⁠

 

बिंदुवार जानिए क्‍या है अनुच्‍छेद 370

1. संविधान का अनुच्छेद 370 अस्‍थायी प्रबंध के जरिए जम्मू और कश्मीर को एक विशेष स्वायत्ता वाले राज्य का दर्जा देता है।

2. 370 का खाका 1947 में शेख अब्दुल्ला ने तैयार किया था, जिन्हें प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था।

3. शेख अब्दुल्ला ने 370 को लेकर यह दलील दी थी कि संविधान में इसका प्रबंध अस्‍थायी रूप में ना किया जाए। उन्होंने राज्य के लिए मजबूत स्वायत्ता की मांग की थी, जिसे केंद्र ने ठुकरा दिया था।

4. 370 के प्रावधानों के अनुसार संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है। लेकिन अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू कराने के लिए केंद्र को राज्य का अनुमोदन चाहिए।

5. इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर पर संविधान का अनुच्छेद 356 लागू नहीं होती है। राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।

6. भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। यहां के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है। एक नागरिकता जम्मू-कश्मीर की और दूसरी भारत की होती है।

7. यहां दूसरे राज्य के नागरिक सरकारी नौकरी नहीं कर सकते हैं।

8. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता है।

9. अनुच्छेद 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा और प्रतीक चिन्ह भी है।

10. 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता था।

 

Filed in: इंडिया, जम्मू और कश्मीर

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