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एक अंतहीन सीरिअल का सिलसिला जो अभी भी जारी है

मनोज यादव संवाददाता

मनोज यादव संवाददाता

शनिवार की सुबह आतंकवादियों द्वारा सुजवान आर्मी कैंप पर हुआ हमला यह बताता है की भारत की आतंक से लड़ने और उससे निपटने की तमाम कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं । हमले में जहां आर्मी के दो जवान शहीद हो गए वहीं एक मासूम सहित 6 जवान घायल हो गए यह एक ऐसा अंतहीन सिलसिला है जिस से निपट पाना हिंदुस्तान की हुकूमत के लिए टेढ़ी खीर नजर आ रहा है देश की एकता अखंडता और संप्रभुता के साथ देश की जनाकांक्षाओं जुड़ी रहती है।  हिंदुस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में शांति और अहिंसा का हिमायती रहा है और देश की आजादी के बाद वह संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर तमाम देशों के बीच हुए समझौते में शांति और अहिंसा को हमेशा वरीयता देकर यह साबित किया है कि सुलह और समझौते में शान्ति व्यवस्था ढूढी जा सकती है लेकिन पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद हमेशा भारत की शान्तिनीति में खलल डालता रहा है जिसका खामियाजा भारत लगातार भुगत रहा है जहां देश के सैनिक शहीद होकर अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं वही देश की जनाकांक्षाओं भी इससे पूरी तरह जुडी रहती है। क्या यह सिलसिला बदस्तूर ऐसे ही जारी रहेगा या कोई ऐसा भी पड़ाव आएगा जब देश के जवानों की समस्याएं खत्म भी हो सकती हैं पाकिस्तान से अब यह उम्मीद करना निरर्थक ही है कि वह किसी ऐसे समझौते पर कायम हो कर भारत का साथ दे सकता है पाकिस्तान की यह नीति हमेशा रही है कि किसी न किसी तरीके से भारत को परेशान किया जाए और उसका सबसे आसान तरीका है उसने जो इजाद किया है वह यह है कि आतंकवादियों के सहारे हिंदुस्तान के आम जनमानस में आतंक और भय का माहौल पैदा किया जाए भारत सरकार हमेशा इस मुद्दे पर अपना लचीला रवैया बनाए रखी है यूपीए सरकार हो या फिर एनडीए की सरकार दोनों में कोई विशेष अंतर नहीं दिखाई दे रहा है अब तो आवश्यकता इस बात की है भारत को हर प्रकार के लचीले रवैये की तिलांजलि देकर आर या पार की लड़ाई के लिए तैयार हो जाना चाहिए नहीं तो भविष्य में भविष्य यह स्थिति और भी विकराल हो जाएगी

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