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कई राज्य भर्ती बोर्डों के दुष्चक्र में फंसे छात्र

करोड़ों की संख्या में युवा भारत के अलग-अलग राज्यों के चयन आयोगों की धांधली के शिकार हैं.

रवीश कुमार की कलम से

रवीश कुमार की कलम से

डावोस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा है कि भारत का युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, देने वाला बनने की राह पर है. नौकरियों में प्राइम टाइम का यह 5वां एपिसोड भारत के उन युवाओं के बारे में हैं, जिन्हें नौकरी देने वाली संस्था नौकरी नहीं दे रही है. लगता है ये संस्थाएं भी इसी राह पर काम कर रही हैं कि भारत के युवाओं को नौकरी न दें ताकि वे खुद अपनी नौकरी खोज लें और फिर दूसरों को भी दें.

करोड़ों की संख्या में युवा भारत के अलग-अलग राज्यों के चयन आयोगों की धांधली के शिकार हैं. ऐसे युवा समय से नौकरियों में आकर देश के उत्पादन में हाथ ही बढ़ाते मगर एक चिट्ठी के इंतज़ार में उनके साल तमाम हो रहे हैं. इंतज़ार है कि किसी एक सरकार की जो चयन आयोग को इस स्तर का बना दे कि वह भी जॉब गिवर यानी नौकरियां देने वाली संस्था बन जाए न कि नौकरियों के नाम पर युवाओं का सत्यानाश करने वाली संस्था बनी रहे.

बिहार में तो बीपीएससी के छात्र 2014 में फॉर्म भर कर अभी तक नतीजा आने का ही इंतज़ार कर रहे हैं. उम्मीद है जल्दी ही ये युवा भारत के प्रधानमंत्री और सभी मुख्यमंत्रियों के सपने में आएंगे और इन युवाओं के सपनों का ख़्याल करेंगे. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने कर्मचारियों के चयन करने वाली संस्था पश्चिम बंगाल राज्य कर्मचारी चयन आयोग को भंग कर दिया है. उसे पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग में मिला दिया है. छात्रों का कहना है इससे आयोग ने जो परीक्षाएं ली थीं, वो अटक गईं हैं. उनका भविष्य अधर में है.

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग नौकरियों के इंतज़ार में नौजवान 10 महीने से प्रदर्शन कर रहे थे कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया जाए और इम्तहानों की प्रक्रिया शुरू हो. योगी सरकार के आते ही पुराने चेयरमैन ने इस्तीफा दे दिया था. इधर राज्य में कई प्रदर्शन हुए मगर उसके बाद भी 10 महीने लग गए चयन आयोग के गठन में. अब जाकर चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति हई है. नौजवानों का कितना कीमती वक्त गुज़र गया है. 10-10 महीने तक चयन आयोग के चेयरमैन का ही चुनाव होते रह जाता है. आयोग की परीक्षाएं जैसे महीनों अटकी रहती हैं. उसी तरह अटकी रही आयोग के चेयरमैन की नियुक्ति.

नौकरियों पर हमारी सीरीज का यह पांचवां एपिसोड है. हमें कुछ ऐसे छात्रों के ईमेल मिले हैं, जिनका कहना है कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की परीक्षा पास कर 800 से अधिक अभ्यर्थियों की अभी तक ज्वाइनिंग का इंतज़ार कर रहे हैं. 1 अप्रैल 2017 को रिज़ल्ट आया और अभी तक सबकी नियुक्ति नहीं हुआ है. छात्रों का कहना है कि बैंक से संपर्क करते हैं, जवाब मिलता है लेकिन उनकी ज्वाइनिंग नहीं हो रही है. हम बैंक से संपर्क नहीं कर सके हैं, लेकिन अगर बैंक से जवाब आया तो अगले एपिसोड में शामिल करेंगे. इन छात्रों का कहना है कि 31 मार्च 2018 तक इनकी ज्वाइनिंग नहीं हुई तो एक साल के इंतज़ार के बाद ये नौकरी के लायक नहीं रहेंगे, इनका रिज़ल्ट रद्द हो जाएगा. क्या 800 से अधिक छात्रों की परेशानी बिग स्टोरी नहीं हो सकती है, क्या इसलिए नहीं होगी क्योंकि ये नौजवानों की ज़िंदगी से जुड़ा मामला है.

एग्रीकल्चर फील्ड ऑफिसर का यह पद होता है. इसके लिए बीएससी एग्रीकल्चर या बीटेकी एग्रीकल्चर के छात्र योग्य माने जाते हैं. हर बैंक अपनी ग्रामीण शाखाओं के लिए नियुक्त करता है. ये ऑफिसर ही किसानों के लोन का आंकलन करते हैं. इसके अलावा 800 से अधिक क्लर्क की नियुक्ति का भी मामला है. 23 जनवरी की सेट्रल बैंक ऑफ की इंडिया की साइट से पता चलता है कि 1 अप्रैल 2017 को पास हुए 280 क्लर्कों को 5 फरवरी को ज्वाइन करने के लिए कहा गया है. अभी भी 603 क्लर्क पास कर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं.

बहुत सारे छात्र अपनी पहली नौकरी छोड़ कर इस परीक्षा में बैठे और चिट्ठी मिलने के इंतज़ार में हैं. जब अप्रैल 2017 में रिजल्ट आ गया था तो यह देरी क्यों हो रही है. एक छात्रा ने लिखा है कि कुछ छात्रों के बायोमेट्रिक्स मैच नहीं हुए हैं इसलिए ज्वाइनिंग नहीं हुई है. अगर ऐसा है तो यह गंभीर मसला है. मेन्स का इम्तहान देने पर अंगूठे की छाप ली जाती है फिर जब पेपर दे देते हैं तो फिर अंगूठे की छाप ली जाती है. अब रिजल्ट के बाद जब बैंक पहुंचे दस्तावेज़ लेकर तो अंगूठे की निशान को मिलाया जाने लगा. कई छात्रों के निशान अगर नहीं मिले तो पूरी प्रक्रिया में काफी लंबा वक्त मिल जाता है. हैदराबाद के लैब से जांच होती है और आते-आते शाम हो जाती है. यह बेहद भयावह है.

अब चलते हैं हरियाणा. हरियाणा क्लर्क संघर्ष समिति ज़िला कैथल, हमारी संस्थाएं लोगों को कैसी कैसी समितियां बनाने के लिए मजबूर कर देती हैं. क्लर्क संघर्ष समिति हरियाणा के झज्जर, करनाल, महेंगढ़, जीन्द, हिसार, रोहतक, सोनीपत में भी बनी है. आठ ज़िलों में ये क्लर्क संघर्ष समिति चल रही है. हरियाणा क्लर्क संघर्ष समिति ज़िला भिवानी का यह वीडियो इन्हीं छात्रों ने बनाया है. ये सारे वो लोग हैं जो क्लर्क का इम्तहान दे चुके हैं, रिज़ल्ट भी आ गया है और इंटरव्यू भी हो चुका है. 13 अक्तूबर से 28 अक्तूबर 2017 के बीच इंटरव्यू भी हो चुका है. मगर अक्तूबर से जनवरी आ गया इसका नतीजा नहीं आया है. इसलिए अलग-अलग ज़िलों में संघर्ष समिति बनाकर ये छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. यह वीडियो 8 दिसंबर 2017 का है. इन छात्रों ने अलग-अलग जगहों पर मुख्यमंत्री खट्टर से छह बार मुलाकात की है.

छात्रों का कहना है कि 26 अक्टूबर 2017 को सीएम ने कैबिनेट बैठक में बोला था कि जल्दी ही बहाली हो जाएगी. इन छात्रों ने 11 ज़िलों के एसडीएम को ज्ञापन भी दिया ताकि मुख्यमंत्री तक सूचना पहुंच जाए. अभी तक बहाली नहीं हुई है. 6000 से अधिक लोगों को नौकरी मिल सकती थी. अभी भी मिलने की उम्मीद है मगर यह देरी क्यों हैं. यह छात्र जिस परीक्षा के रिज़ल्ट का इंतज़ार कर रहे हैं उसका पहला विज्ञापन 24 नवंबर 2015 को निकला था. दो साल से अधिक समय बीत चुका है.

पहली बार विज्ञापन निकला तो क्लर्कों की संख्या 4,425 भी. दो महीने बाद इसकी संख्या बढ़ाकर 5,408 कर दी गई. 18 मई 2016 को फिर विज्ञापन निकला और पदों की संख्या 6,134 हो गई. बारहवीं पास की योग्यता वाले इन पदों के लिए सात लाख से अधिक आवेदन आए. तीन लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी. 28 अक्तूबर 2017 तक इंटरव्यू हुआ. इस परीक्षा प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग कारणों से तीन बार मुकदमे हुए. 15 बार से ज़्यादा केस की सुनवाई हो चुकी है. छात्र कई बार सीएम से मिले, जनता दरबार में भी और सीएम आवास पर भी, लेकिन इनको सिर्फ आश्वासन ही मिला. 12 दिसंबर 2017 को जनता दरबार में सीएम से मिले तो इन्हें 20 दिसंबर 2017 को सीएम आवास पर चंडीगढ़ बुलाया गया. आठ बजे सुबह से आठ बजे रात तक प्रतीक्षा करने के बाद इनको बताया गया कि सीएम व्यस्त हैं, नहीं मिल सकते. हमने उनसे पूछा कि क्या आप किसी एक परीक्षा का उदाहरण दे सकते हैं जो छह महीने के भीतर परीक्षा की प्रक्रिया पूरी कर ली हो. आप जवाब सुनिये, तय कीजिए कि इससे इन छात्रों का कितना भला होता है.

हमने नौकरियों के चौथे एपिसोड में झारखंड लोकसेवा आयोग और राज्य कर्मचारी आयोग का खस्ता हाल दिखाया था कि किस तरह से नौजवानों को फॉर्म भरवा कर, इम्तहान टलवा कर बर्बाद किया जा रहा है. झारखंड बीजेपी के खिजरी से विधायक राम कुमार पाहन ने विधान सभा में नौकरियों का मसला उठाया. पाहन जी ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग बार-बार नियम बदलकर इम्तहान की तारीख आगे बढ़ा देता है. जिसके कारण नौजवान की नौकरी पाने की उम्र खत्म हो जाती है और वे बेरोज़गार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ नौकरी देने की बात कर रही है, लेकिन उल्टा हो रहा है. झारखंड में नेता विपक्ष हेमंत सोरेन ने भी झारखंड लोक सेवा आयोग का मसला उठाआ.

हम नहीं कहते कि यह प्राइम टाइम का असर है. नौजवानों को नौकरी मिले और उन्हें नौकरी देने के नाम पर यह सरकारी लूट बंद हो इसी में सबका भला है. मुझे श्रेय लेने में दिलचस्पी नहीं है. इतना ज़रूर पता चला है कि किम जोंग जो आज कल अपना चैनल छोड़कर हिन्दी चैनल देख रहे हैं. लेकिन जब से उसने प्राइम टाइम में नौकरियों पर सीरीज़ देखी है भाई साहब मिसाइल से उतर कर पैदल भाग रहे हैं. किम जोंग को पता है कि नौजवानों को नौकरी नहीं मिली तो वे मिसाइल बन जाएंगे. रेलवे के परीक्षार्थी ज़रा धीरज रखें. हमें वक्त लग रहा है मगर हम उनकी समस्या ज़रूर दिखाएंगे.
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राजस्थान पब्लिक सर्विस कमिशन और दिल्ली स्टाफ सलेक्शन बोर्ड की भी हालत ठीक नहीं है. हम उस पर भी रिसर्च कर रहे हैं. सेंट्रल गवर्नमेंट के स्टाफ सलेक्शन कमिशन के चेयरमैन ने वादा किया है कि फरवरी के अंत तक हज़ारों नौजवानो को ज्वाइनिग की चिट्ठी मिलने लगेगी. लड़के जब सीएजी के दफ्तर में फोन कर रहे हैं तो कुछ और जवाब मिल रहा है. हम इस स्टोरी पर तब तक बने रहेंगे जब तक उन्हें अप्वाइंटमेंट लेटर नहीं मिल जाता है. मैं किसी बिग स्टोरी में यकीन नहीं करता. इस स्टोरी से इतनी आसानी से पीछे नहीं हटूंगा. आपको बोरिंग लग सकता है मगर सोचिए नौजवानों की क्या हालत होती होगी, क्या उन्हें रिज़ल्ट का इंतज़ार बोरिंग नहीं लगता होगा. ssc combined graduate level 2016 की परीक्षा पास किए एक नौजवान ने मुझे पत्र लिखा है. एक तो मुझे सर न कहा करें. एक ही सर काफी है, उसके ऊपर और सर न रखें. तो छात्र ने लिखा है कि  मैं एसएससी सीजीएल 2016 की परीक्षा पास कर चुका हूं. एक्साइज़ इंस्पेक्टर की पोस्ट मिली है. लेकिन छह महीने से ज्वाइनिंग नहीं हुई है. अब तो बाबूजी को भी यकीन नहीं हो रहा है कि मैंने परीक्षा पास की है. उन्हें लगता है झूठ बोल रहा हूं. जब उन्होंने प्राइम टाइम में देखा तो उनको यकीन हुआ कि जो मैं बोल रहा था सच है.

हमारे नौजवानों की मानसिक पीड़ा को समझिए. उन्हें परेशान मत कीजिए. ये अच्छे लड़के हैं. अनुराग द्वारी ने मध्य प्रदेश से एक स्टोरी भेजी है. वहां बेरोज़गार सेना बन गई है. मध्य प्रदेश में ही व्यापम घोटाला हुआ था, जिसमें 110 से ज़्यादा लोगों के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दायर किया है. अनुराग की यह रिपोर्ट देखिए. सोचिए कि आपके नौजवानों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है. 

 

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