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कांग्रेस का रमन सरकार पर वार,पूछा-क्यों हर सड़क को हर 6 महीने में दुबारा बनाने की नौबत आती, क्यों पुलों में साल भर के अंदर ही दरार आती है?

 vरायपुर : कांग्रेस भवन रायपुर में वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे द्वारा लोक-निर्माण, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण विभाग के विषय में लिये गये पत्रकार-वार्ता के प्रमुख बिन्दु

# पीडब्ल्यूडी विभाग की 14 वर्षीय उपलब्धियों में विभाग द्वारा निर्मित हर एक सड़क, भवन के निर्माण में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का होना है। विभागीय बजट में 12-14 गुना इजाफा होने का दावा है फिर भी कई योजनाएं ऐसी हैं जो सालों से लंबित हैं। नार्थ-साउथ कारीडोर समेत कोई भी बड़ी योजना इन वर्षों में पूरी नहीं हुई है। 14 साल में रायपुर-बिलासपुर मार्ग नहीं बना। नई सड़कों पर कोई काम नहीं हुआ। जबकि इन वर्षों में तो नार्थ-ईस्ट कारीडोर के साथ ईस्ट-वेस्ट काॅरीडोर भी बन जाना था। इन वर्षों की उपलब्धियों में राज्य के कई शहरों का नामकरण ‘खोदापुर’ कर दिया जाना भी है।
# विभागीय मंत्री को इस बात का जवाब देना चाहिए कि क्यों उनके विभाग की हर योजना ओवर इस्टीमेट होती है, क्या कमीशनखोरी के कारण?
# क्यों उनके विभाग के कार्यों में स्पेसिफिकेशन में एडजस्टमेंट जैसा शब्द बहुत ज्यादा सुनाई देता है?
# शहरों में डिवाइडर निर्माण अलाइनमेंट को लेकर सही गाइड लाइन नहीं है। काम का टेंडर कुछ भी कहे लेकिन टेबल के नीचे से लेन-देन के बिना कार्य होता नहीं, वर्क ऑर्डर जारी करवाने के लिए बंगले में लाइन लगती है। सबसे बड़ी उपलब्धि तीन महीने में सड़कों का टूट जाना और मंत्री द्वारा फेसबुक पर उसे चमचमाती हुई सड़क बताना, विदेश के पुल को अपने विभाग द्वारा निर्मित बताना है।
#  पीडब्ल्यूडी विभाग के बजट में वर्ष 2017-18 कार्यों के निष्पादन बजट में बताया गया है कि राजकुमार कॉलेज से शास्त्री चैक तक फलाईओवर निर्माण 2015-16 से अपेक्षित है। इसके बारे में कहा है कि कार्य प्रगति पर है। रेलवे स्टेशन से ओल्ड पीएचक्यू तक भी फ्लाईओवर का निर्माण प्रगति पर बताया गया है। जबकि इन दोनो जगहों पर फ्लाईओवर के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है। जबकि पांच करोड़ से ज्यादा इसके लिए खर्च भी किया जाना बताया गया। इसकी बजाय आनन-फानन में स्काई वॉक बनाने की योजना पारित कर उस पर काम भी शुरु कर दिया गया जबकि इसकी उपयोगिता ही नहीं है, महज उपलब्धियां दिखाने और कमीशनखोरी के लिए ऐसा किया गया। यही स्थिति साइंस कॉलेज मैदान पर नवनिर्मित ऑडिटोरियम की है, सिर्फ दीनदयाल नाम रखने के लिए उसका निर्माण कर दिया गया, निर्माण के पश्चात वह कितना उपयोग हुआ यह तो मंत्री क्या मुख्यमंत्री भी नहीं बता सकेंगे।
#   विभाग में भ्रष्टाचार की यह स्थिति है कि हर सड़क की अपनी कहानी है, जगदलपुर बायपास रोड के निर्माण में भ्रष्टाचार, मोवा से विधानसभा रोड के निर्माण में भ्रष्टाचार, जशपुर-सन्ना सड़क के निर्माण में भ्रष्टाचार, इसके अलावा वर्ष 2014 में राज्य भर के 17 हाइवे की मरम्मत के टेंडर में राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का भ्रष्टाचार जिससे सरकारी खजाने को लगभग छह सौ करोड़ के नुकसान हुआ।
#   कमीशनखोरी के लिए मरम्मत योजना में राज्य की सड़कों के साथ ही नेशनल हाईवे को भी शामिल कर लिया जाता है जबकि नेशनल हाईवे का काम विभाग का नहीं है, जब नेशनल हाईवे अथॉरिटी पत्र लिखता है तब मंत्री और अफसरों की नींद खुलती है। blast-news
#    बिलासपुर के बाहरी इलाके में रायपुर और कोरबा बायपास पर तुरकाडीह पुल 2007 में बना लेकिन लोकार्पण के साल भर बाद ही उसमें दरारें क्यों आई, पुल की रिपेयरिंग कार्य में दो करोड़ 90 लाख खर्च हुए जबकि पुल निर्माण की लागत ही 3 करोड़ 70 लाख थी। यह रमन राज का सुशासन है। इसी वर्ष बिलासपुर कटघोरा होकर जाने वाले अंबिकापुर हाइवे पर निर्माणाधीन पुल घटिया निर्माण क्वालिटी के चलते गिर गया जिसमें मजदूर की मौत भी हुई।
#    प्रदूषण के मामले में राजधानी की हालत दिल्ली जैसी हो चुकी है, काली राख के कारण लोगों ने यहां शरद पूर्णिमा बनाना ही कई वर्षों से बंद कर दिया है। प्रदूषण के मामले में लोगों को सीख दी जा रही है जबकि मंत्री का ही विभाग उरला और उरकुरा में चोरी-छिपे स्टील संबंधी उद्योगों को सैकड़ों करोड़ की लागत से विस्तार की अनुमति दे रहा है।
#    राज्य में रमन सरकार की 14 साल की उपलब्धियां गिनाने वाले पीडब्लूडी, परिवहन, आवास और पर्यावरण मंत्री राजेश मूणत तथाकथित विकास का ब्यौरा देने से पहले इन 14 वर्षों में अपना, और अपने विभागीय अधिकारियों के हुए ‘विकास’ का ब्यौरा देते तो बेहतर होता।
#    एसीबी के पास सबसे ज्यादा शिकायतें पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की है, और कार्रवाई भी। भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त होने वाले अफसर कर्मी भी इन्हीं मंत्री के विभाग के ही है, इससे साबित होता है कि 14 सालों में किसका ‘विकास’ हुआ है, और क्या उपलब्धियां हैं।

#    माननीय मंत्री जी ने आज प्रेसवार्ता में 14 वर्ष की उपलब्धियां बताते हुये जानकारी दी कि नई राजधानी में एशिया का सबसे बड़ा गोल्फ कोर्स बनाया जा रहा है। अच्छा होता कि यहां एशिया का सबसे बड़ा सर्वसुविधा युक्त गरिबों के लिये हास्पिटल बनाने में सरकार की दिलचस्पी होती।

#   छत्तीसगढ़ में ही ऐसा क्यों होता है कि टेंडर खुलने के बाद बार-बार उनको रद्द किया जाता है?

#    2030 तक 5 लाख की आबादी का लक्ष्य नई राजधानी का बताया गया है, किन्तु मंत्री जी को साढ़े बारह लाख की आबादी वाले रायपुर शहर की चिंता क्यों नहीं है?

#    14 साल में मात्र 15 रेल्वे ब्रिज और 4 अंडरब्रिज ही बना पायी है, ये विभाग की उपलब्धि है।

#    जितने सड़कों का निर्माण किया गया है उनके किनारे लगे लाखों पेड़ों को सड़क निर्माण के नाम पर काटा गया है। उनका क्या हिसाब किताब है उसकी भी जानकारी सरकार को बतानी चाहिये।

#    मंत्री जी ने परिवहन विभाग की उपलब्धि बताते हुये परिवहन से प्राप्त राजस्व को इन 14 सालों में 156 करोड़ से बढ़ाकर 998 करोड़ तक बढ़ाने की बाते कही है, लेकिन अगर छत्तीसगढ़ का परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार नहीं होता तो शायद विभाग का राजस्व इन 14 सालों में 156 करोड़ से बढ़कर 1500 करोड़ रू. तक हो सकता था।

# पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के कारण देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में राजधानी रायपुर का नाम शुमार हो गया है। यहां की आबोहवा जानलेवा स्तर तक खतरनाक हो गई है। यहां स्थापित उद्योगों एवं वाहनों द्वारा उत्सर्जित धुएं से प्रभावित होकर लोग श्वास, आंख, त्वचा संबंधी गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

# प्रदूषण की मात्रा यहां सामान्य से कई गुना अर्थात 400 माइकोग्राम प्रति घनमीटर है जबकि प्रदूषण बोर्ड के मानक के अनुसार सामान्यतः 24 घंटे का औसत 60 माईकोग्राम प्रति घनमीटर माना गया है।

# प्रदूषण की इतनी भयावह स्थिति के बाद भी राज्य शासन ने इसकी रोकथाम की दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।

# गरियाबंद में 10 करोड़ की लागत से बना पुल लोकार्पण के पहले ही ढहा था।

#  67 लाख की लागत से खैरागढ़-धमधा मार्ग निर्माण में भी भारी गड़बड़ी। गैरकानूनी तरीके से मुरुम खुदाई।

#  राजनांदगांव के खैरागढ़-धमधा मार्ग पर बाजार अतरिया व जोरातराई के बीच पुल निर्माण में अनियमितता के कारण पहली बारिश में ही बीच से क्रेक हुई थी।

#   रायगढ़ के सूरजगढ़ और नदीगांव के बीच 1830 मीटर लंबा पुल 5647 लाख की लागत से बना, लेकिन सिर्फ 4 साल में ही एक हिस्सा जर्जर, छड़ें बाहर निकल गईं।
# राजधानी रायपुर से लगे बिलासपुर रोड पर बना धनेली ब्रिज दो सालों में ही जर्जर हो गया है उपयोग के लायक नहीं रह गया है।

Filed in: छत्तीसगढ़, टॉप 10, पॉलिटिक्स, रायपुर

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