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कुटिल विचारों की तिलांजलि देकर प्रेम दिवस को बनाए महोत्सव

मनोज यादव संवाददाता

मनोज यादव संवाददाता

वेलेंटाइन डे प्रेम का उत्सव है। जज्बात और भावनाओं को प्रेम के सागर में विखेर देने का महोत्सव। हिन्दुस्तान में कई ऐसे संगठन और धार्मिक लम्बरदार है जो ऐसे दिवस पर अपनी भौहे सिकोड़ लेते है। कोई भी उत्सव या पर्व दुनिया के किस कोने में किस तरह से मनाया जाता है हम हिन्दुस्तानी उसे अपने तरीके से उसका भारतीयकरण करने के लिए मशहूर है। विश्व में सनातन आस्थाओं और भारतीय संस्कृति को नया आयाम देने वाले हम सब के प्रेरणापुंज स्वामी विवेकानन्द ने सभी दुनिया की संस्कृति और उसकी भावनाओं को अंगीकार किया। हम विदेश की इस प्रेममयी संस्कृति को नफरत से ख़त्म नहीं कर सकते है। हम उस परम्परा के संवाहक है जंहा प्रेम की अलौकिक और अद्भुत संस्कृति भगवान कृष्ण के साथ जन्म लेती है और गोपियों के साथ सम्यक विश्व को प्रेमभाव में सराबोर कर देती है। भगवान पुरुषोत्तम राम सबरी के जूठे बेर चखकर सामाजिक समरसता और प्रेम का अनूठा सन्देश देते है। गांधी जी ने भी प्रेम और सदभाव को अपने जीवन दर्शन का आधार बनाया और दुनिया में उसका बीजारोपण किया। कबीर जैसे महान संत ने भी मजहबी दीवारों को धराशायी करके उन्मुक्त गगन में विचरण करने की हमें अनोखी नसीहत से लैस किया। संत वेलेंनटाइन से हम क्यों नफ़रत करे। अगर उनके विचारों से युवा प्रभावित है तो भारतीय होने के नाते हम सभी उसका भारतीयकरण करने से क्यों बाज आये। हमें भी प्रेम के इस दिवस पर उसके श्याह पक्ष की तिलांजलि देकर उसके अनुपम और कृष्णमयी प्रेम का आनंद उठाये। विचारों में उज्जवलता और प्रकाश का समावेश करते हुए उसके कुटिल विचारों को नजरअंदाज करने से हम वेलेनटाइन के महत्त्व को और भी बेहतर तरीके से रेखांकित कर सकते है।

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