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कुमार विश्वास जवाब दे-कवि बेबाक जौनपुरी

1नई दिल्ली (विनोद कुमार गुप्ता): पांच सौ किताबें छपवा कर तीन सौ अपने दोस्तो में और दो सौ समीक्षकों में बांटने से हिन्दी का भला नही होगा!

मैं विनम्रता से पूछना चाहता हूँ…फिर हिंदी का भला कैसे होगा? आपके कितने गीत…गजल…कविता संग्रह प्रकाशित हुये है? आप अपना साहित्यिक योगदान बताएं? हिन्दी साहित्य में सम्भवत: ही कोई ऐसा कलमकार हो जिसने अपनी जेब से पैसा लगा कर अपनी रचनाओं को न छपवाया हो? क्या यह टिप्पणी उन तमाम कलमकारों का अपमान नही जो अपनी मेहनत के कमाए धन से अपनी रचनाओं को छपवा कर साहित्य की सेवा कर रहे है! आप अपने को सबसे मंहगा कवि कहते हो…मूर्ख है वो आयोजक जो आपको इतनी रकम देकर..आपको बुलाते है,यह केवल मार्किटिंग है मेरे भाई…वरना आपसे लाख गुणा बेहतर लिखने वाले कवियो को मैं जानता हूँ! कहो तो मिलवा दूंगा! मै तो बहुत छोटा सा कलमकार हूँ…अभी तक अपने को कवि कहने समझने का साहस भी नही कर पाया! अभी आपकी टिप्पणी”जो मेरी कविता पर ताली नही बजाऐगा…अगले जन्म में दरवाजे दरवाजे ताली बजाएगा…धन्य है आपका महान संचालन व प्राप्त साहित्य प्रसाद! अब तो कविताओं में ड्रम…ढ़ोलक …भी बज रहा…इस महान साहित्यिक सेवा के लिए आपको जितने आभार मिले…कम पडेगें! कवि बेबाक जौनपुरी..(साहित्य आज तक पर दी गई टिप्पणी)

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