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क्या आप जानते है हर coin में रहते हैं secret codes! इनसे होती है पहचान

bhaiनई दिल्ली । क्या आपको पता है कि आपके जेब में रखा सिक्का कहां गढ़ा गया? शायद इसका जवाब हर किसी के पास ना हो, लेकिन ये चंद बातों को जानने के बाद आप अब अपने जेब के सिक्कों को देखकर बता सकेंगे कि देश की चार टकसाल में से यह कहां तैयार किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश में मुद्राओं का चलन 1938 में पांच रुपए के नोट से शुरू किया। आधुनिक मुद्राएं जार्ज-6 के चित्रों के साथ लोगों तक पहुंची, जबकि देश की आजादी के बाद 1950 में पहली बार सिक्कों का चलन प्रारंभ हुआ था। आइए आपको बताते हैं भारतीय मुद्राओं से जुड़े रोचक तथ्य, जिसे शायद आप भी अब तक नहीं जानते होंगे।

सिक्कों पर होते हैं ये सीक्रेट कोड

देश के चार टकसालों में सिक्कों के निर्माण होते हैं। मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद व नोएडा टकसालों में बनने वाले सिक्कों पर एक खास चिन्ह दिया जाता है। ये ऐसे चिन्ह हैं जिनसे सिक्कों की पहचान की जा सकती है कि वे कहां तैयार किए गए। ये निशान सिक्के के पिछले हिस्से पर निर्माण तिथि के नीचे अंकित होते हैं। सिक्के पर टकसाल को प्रदर्शित करने वाले चार निशान होते हैं। 

मुंबई – हीरा

कोलकाता – कोई निशान नहीं

हैदराबाद – सितारा

नोएडा – डॉट

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देश की चार टकसालों में होता है निर्माण

देश में सिक्के बनाने के लिए चार टकसाल (मिंट) बनाए गए हैं। इन टकसालों में सबसे पुराने मिंट कलकत्ता और मुंबई है। इसकी स्थापना 1859 में अंग्रेजी हुकूमत में हुई थी। 

 

मुंबई टकसाल – मुंबई टकारल भारत की सबसे पुरानी मिंट में से एक है। इसका निर्माण अंग्रेजों ने किया था। उस वक्त भी मुंबई अंग्रेजों के आर्थिक पहलुओं के लिहाज से अच्छा क्षेत्र था।

कलकत्ता टकसाल – इस मिंट की शुरुआत भी अंग्रेजों ने की और साल 1859 में पहली बार इस टकसाल में सिक्कों का निर्माण किया गया था। 

हैदराबाद टकसाल – हैदराबाद मिंट साल 1903 में हैदराबादी निजाम की सरकार ने स्थापित किया था। साल 1950 में भारत सरकार ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था।

नोएडा टकसाल – नोएडा मिंट को 1986 में स्थापित किया गया था और 1988 से यहां स्टेनलेस स्टील के सिक्कों का निर्माण हो रहा है।

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