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गुटखा किंग की अंतिम इच्छा बेटियों ने की पूरी

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किसी व्यक्ति की मौत हो जाने पर लोग शोक मनाते है लेकिन फूलों से सजा रथ और बैंड-बाजे की धुन पर नाचते ये लोग, भ्रम पैदा कर सकते है कि ये लोग शोक मना रहे है या फिर उत्सव। दरअसल ये नजारा नोएडा के प्रसिद्ध उधोगपति हरिभाई लालवानी की अंतिम यात्रा का था। जिसमें पूरा परिवार और रिश्तेदारों ने मातम के बजाय बैंड-बाजे पर डांस करते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी। आखिरी इच्छा थी कि उनकी अंतिम यात्रा के दौरान उनके शव को मातम मनाते हुए नहीं जश्न मनाते हुए श्मशान घाट ले जाया जाये।3-copy

उनकी बेटियो ने पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए मौत पर मातम के बजाय जश्न मनाया और अर्थी को कंधा देने के साथ-साथ पिता को मुखाग्नि देकर उनका दाह संस्कार किया।

उनकी बेटी दिप्ती लालवानी ने बताया कि हरिभाई लालवानी ने कभी लड़का और लड़की मे फर्क नहीं किया। उन्होंने अपनी चारों बेटियों को अच्छे से पढ़ाया-लिखाया और अपने पैरों पर खड़ा किया। आज वो बेटियां पिता का कारोबार देख रही है जबकि हरिभाई सामाजिक कार्यो से जुड़े हुए थे।1

आपको बता दें कि नब्बे के दशक में हरिभाई लालवानी गुटखा किंग कहलाते थे। प्रिंस गुटखा उनका फेमस ब्रांड था। लालवानी एक समय नोएडा के उद्योगपतियों के हीरो थे। जब नोएडा के तत्कालीन चेयरमैन नीरा यादव के साथ उद्यमियों की लड़ाई लंबी खिंची थीं। वे नीरा यादव के खिलाफ विरोध करते हुए जेल भी गए थे। उन्हें राष्ट्रपति के हाथों बेस्ट सिटीजन का पुरस्कार भी मिल चुका है।

 

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