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छत्तीसगढ़ : घरघोड़ा से नंदेली जनाधिकार पदयात्रा का समापन

bhaiरायपुर/ घरघोड़ा से नंदेली जनाधिकार पद यात्रा के समापन अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए छत्तीसगढ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने ऐतिहासिक सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि, जीरम की घटना साधारण घटना नही है नंदकुमार पटेल जिस परिवर्तन की यात्रा कर रहे थे वो किसी उच्चवर्गो के लिए नही बल्कि किसान, महिला, युवा, आदिवासी, अनुसूचित जाति, जनजाति, छत्तीसगढ़ के ढाई करोड़ की जनता के लिये परिवर्तन की बात कर रहे थे। ये सरकार में न आदिवासी का हित हो रहा है, न किसानो का हित हो रहा है और न महिला सुरक्षित है, न नौजवान को रोजगार मिल रहा है, इसलिये परिवर्तन चाह रहे थे। जब छत्तीसगढ़ राज के आंदोलन चल रहा था उस समय हमारे पूर्वज ने सपना देखा था छत्तीसगढ़ में सबकुछ है, धरती के अंदर सबकुछ है, दुनिया में जितना खनिज संपदा है वो सब छत्तीसगढ़ में है और इस संपदा का दोहन करके छत्तीसगढ़ को समृद्ध राज्य बनाना है। छत्तीसगढ़ के ढाई करोड़ जनता के सुख, समृद्धि शांति के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य के लिये काम करना है ये परिवर्तन की चाहत लेकर नंदकुमार पटेल दीवाना की तरह छत्तीसगढ़ में चल पड़ा था। उनके कार्यक्रम को देखकर हम लोग कह रहे थे कि बहुत तेजी से चल रहा है टी.एस. सिंहदेव के साथ हम लोगो का चर्चा होता था। लेकिन पटेल जी निरंतर बस्तर से लेकर सरगुजा तक खुद ही दौरा करे और हम लोगो को भी दौड़ाता था। नंद कुमार जी के मन में एक जूनून, एक परिवर्तन की चाहत था। जीरम घाटी में घटना घटी नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, विद्याचरण शुक्ल, महेन्द्र कर्मा, उदय मुदलियार, योगेन्द्र शर्मा सहित 27 नेता और जवान शहीद हुआ। बड़े-बड़े नेताओं की हत्या हुई है। हिन्दुस्तान देखे है महात्मा गांधी के हत्या हुआ है, शांति के दूत की हत्या हुई है।blast-news

इंदिरा गांधी जो जन नेता थे उनकी हत्या होते हुये पूरा भारत वर्ष ने देखा है। राजीव गांधी जैसे नेता के हत्या होते हुये देखा है और दुनिया में राजनेता के बहुत हत्या हुआ है। लेकिन यदि राजनेता का संहार हुआ है तो केवल छत्तीसगढ़ में हुआ है, इनके अलावा और कही नर संहार नहीं हुआ है। पहली स्वाभाविक रूप से मन में सवाल उठते है कि हत्या से किसको लाभ मिला? ये हत्या से नंद कुमार, विद्या भैया, महेन्द्र कर्मा, उदय मुदलियार से किसको लाभ मिला है, यदि इस प्रश्न के उत्तर आपको मिल जाये तो निश्चित रूप से हत्यारा वही लोग है जो इनके अलावा और कोई नहीं है। इस प्रश्न के उत्तर को आप के लिये छोड़ दिया हूं कि इस हत्या के पीछे लाभ किसको मिला और हत्यारा वही लोग है। क्यों जांच नही हो रहा है?  हम लोग कहते है कि सीबीआई की जांच की जाये, सबूत हम लोग देंगे। मुख्यमंत्री जी कहते है कि भूपेश बघेल 4 साल से पकड़े है सार्वजनिक करें। हम देना चाह रहे है सबूत लेकिन एनआईए की जांच फाईनल रिपोर्ट सबमिट हो, आयोग के जांच के दायरा में नहीं है अगर हम लोग सबूत देंगे तो उसका जांच कौन करेंगे?  सवाल इस बात की है कि दिनेश पटेल कोई राजनीति में नहीं थे, लेकिन दिनेश पटेल न तो मंच पर बैठे थे वो धूप में अकेले ही बैठते थे। वो केवल अपने पिताजी को मदद करना चाह रहे थे। नंदकुमार जी के अध्यक्ष बनने के बाद न ही वो मंच पर बैठे है और न ही एक भी माला पहने है और न ही एक भी भाषण दिया है। वो केवल अपने पिताजी की मदद कर रहे थे। मैं ये सवाल पूछना चाह रहा हूं कि दिनेश पटेल की हत्या क्यो हुआ?  नक्सली से उनकी कोई दुश्मनी नहीं थी,लेकिन दिनेश पटेल की हत्या क्यों हुई? हत्या करने से पहले नक्सलियों ने कहा कि दिनेश पटेल को छोड़ देते है, षड़यंत्रकारी के सहयोगी निर्देश दे रहे है कि दिनेश पटेल नहीं छोड़ना है क्योंकि वो नंदकुमार पटेल जी की जगह को लेंगे। bhai

कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि संकल्प लेने के लिये यहां एकत्र हुये है। इस बात का संकल्प लेने के लिये यहां है, जिस काम उन्होने उठाया था, जिस जिम्मेदारी को उन्होने आगे बढ़ाया था, जिस तरीके से छत्तीसगढ़ में पूरे कांग्रेसजनों को एकजुट करके, कांग्रेस की सरकार लाने का संकल्प उठाया था, परिवर्तन का संकल्प, छत्तीसगढ़ का नहीं इस देश का सबसे बड़ा राजनैतिक हत्याकांड था। जीरम घाटी के हत्याकांड में जितने सुरक्षित बचे थे एक-एक को मुझे जगदलपुर अस्पताल में बताया कि एक लड़के को पूछा गया कि आप नंद कुमार पटेल कौन हो? और दिनेश पटेल कौन हो? ये सुपारी वाला हत्याकांड था, षड़यंत्र था। गृह क्षेत्र में एक-एक व्यक्ति के मन में ये बात साफ होनी चाहिये कि नंदकुमार पटेल को छत्तीसगढ़ की राजनीति से अलग करने का जिन लोगों ने षड़यंत्र रचा था उन लागो का कांड था। अब हमको रमन सिंह से न्याय नहीं चाहिये। अगर हम न्याय गुहार करेंगे तो छत्तीसगढ़ की जनता से करेंगे। प्रभारी सचिव जी ने कहा कि कांग्रेस की घोषणा पत्र में भूपेश भाई की मंशा यही है कि कांग्रेस का घोषणा पत्र निकलेगा उसके प्रथम पृष्ठ में यदि हो सकता तो प्रथम बार बिन्दु यह रहेगा जीरम घाटी के हत्यारों को न्याय नहीं हो सकता तो छत्तीसगढ़ के नागरिकों के साथ न्याय नहीं हो सकता। अगर हम लोग किसानों की रक्षा करनी है, महिलाओं की रक्षा करनी है, युवाओं को रोजगार देना है, धान की खरीदी के भाव सुनिश्चित करना है, बिजली के भाव को कम करना, हमको अगर प्रदूषण से छत्तीसगढ़ को रोकना है, पंचायती राज को और स्वायत्त शासित संस्थाओं को मजबूती देनी है, अगर उनके दस्तखत का अधिकार उनको देना है, शिक्षाकर्मियों को, पंचायत कर्मी से लेकर जो प्रेरक गांवों में काम करते है, आंगनबाड़ी, मितानिनों, सहायिकाओं से लेकर कार्यकर्ताओं को उचित व्यवस्था दिलानी है।

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कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उइके ने झीरम की जांच न करने के पीछे भाजपा सरकार की संलिप्तता को जिम्मेदार ठहराया, भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का आव्हान किया।

सचिव प्रभारी कमलेश्वर पटेल ने जीरम की शहादत को नमन करते हुए कहा कि, उमेश पटेल ने जिस तरह आमजनो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे है हमे सहीद नंदकुमार पटेल जी की याद दिलाती है। प्रभारी सचिव कमलेश्वर पटेल ने कहा कि सौदान सिंह जैसे सौदागर घूम रहे हैं। एक साल के लिए कमिशनखोरी बन्द करने की बात करते हुए इन्हें शर्म नहीं आती।

 

 

 

 

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