6:25 pm - Wednesday September 20, 2017

चाणक्य नीति : जानिए हमे किन बातों में करना चाहिए संतोष और किन में नहीं

1जीवन में अधिकांश परेशानियों की वजह है असंतोष। जो वस्तुएं या सुख-सुविधाएं हमें प्राप्त होती हैं हमें उनसे संतुष्ट रहना चाहिए। यदि असंतोष बना रहेगा तो निश्चित ही दुख और परेशानियों का जन्म होता है। आचार्य चाणक्य ने तीन ऐसी परिस्थितियां बताई हैं, जिसमें व्यक्ति को संतोष करना चाहिए। जबकि तीन ऐसे काम बताए है जिनमे संतोष नहीं करना चाहिए।

संतोषषस्त्रिषु कर्तव्य: स्वदारे भोजने धने।
त्रिषु चैव न कर्तव्यो अध्ययने जपदानयो:।।

आचार्य चाणक्य के अनुसार हमें तीन बातों में संतोष कर लेना चाहिए अन्यथा कष्ट झेलना पड़ते हैं। ये तीन बातें हैं पत्नी की सुंदरता के संबंध में, भोजन के संबंध में, धन जितना भी हो। इसके अलावा तीन बातों में कभी भी संतोष नहीं करना चाहिए ये है अध्ययन, दान और जप।

1. अपनी स्त्री (पत्नी)

हर व्यक्ति को अपनी पत्नी से ही संतुष्ट रहना चाहिए। दूसरी स्त्रियों के पीछे नहीं भागना चाहिए। दूसरी स्त्रियों पर ध्यान देने वाले व्यक्ति की पत्नी उससे नाराज रहती है। ऐसे में कई बार पति-पत्नी का रिश्ता तक टूट जाता है। इसीलिए अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाए रखने के लिए व्यक्ति को अपनी पत्नी से संतुष्ट रहना चाहिए।

2. भोजन

हमें जो भोजन घर में मिले, उसी से संतुष्ट रहना चाहिए। घर का भोजन छोड़ कर बाहर के खाने पर मन रखने वाला व्यक्ति जल्दी बीमारियों की गिरफ्त में आ जाता है। वह हमेशा ही अपना नुकसान करता है। ऐसा इंसान सिर्फ स्वाद के चक्कर में अपनी सेहत से समझौता करता है और कई बीमारियों का शिकार हो जाता हैं। इसलिए मनुष्य को जो भोजन अपने घर पर मिलता है, उसी से संतुष्ट रहना चाहिए।

3. धन

व्यक्ति को उसकी जितनी आय हो, उसी में संतोष रखना चाहिए। ज्यादा धन या दूसरों के धन के लालच में नहीं पड़ना चाहिए। जिस व्यक्ति की नजर दूसरों के धन पर होती है, वह हर समय दूसरे के धन को पाने की योजना बनाता रहता है। ऐसा मनुष्य कोई गलत काम करने में भी हिचकिचाता नहीं है। इस कारण आगे चल कर उसे कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ता हैं। इससे बचने के लिए मनुष्य को अपने धन से ही संतुष्ट रहना चाहिए।

ये चीजें कितनी भी मिल जाए, इनसे संतुष्ट नहीं होना चाहिए

1. अध्ययन

अध्ययन करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है। मनुष्य को चाहे कितना ही ज्ञान क्यों न मिल जाए, वह कभी भी संपूर्ण नहीं होता है। व्यक्ति को हमेशा ही नया ज्ञान पाने के लिए तैयार रहना चाहिए। हमें जितना ज्यादा ज्ञान मिलता है, हमारा चरित्र उतना ही अच्छा बनता है। सही ज्ञान से जीवन की किसी भी परेशानी का हल निकाला जा सकता है। इसीलिए व्यक्ति कितना ही अध्ययन कर ले, उसे कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए।

2. जप

किसी देवी-देवता की पूजा में मंत्रों का जप करने का विशेष महत्व है। मंत्रों और देवी-देवताओं के नामों का जप करने से हमें सभी परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है और जीवन में शांति बनी रहती है। भगवान को याद करने की कोई सीमा नहीं होती। हम कितना भी जप कर ले, वह कम ही होता है। हमें कभी भी जप से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, हमेशा जप करते रहना चाहिए।

3. दान

शास्त्रों में कुछ काम हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य बताए गए हैं, दान भी उन्हीं में से एक है। हर व्यक्ति को दान जरूर करना चाहिए। हम कितना ही दान करें, कभी भी उसका हिसाब-किताब नहीं करना चाहिए। हमें कभी भी दान से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, जहां भी मौका मिले पवित्र भावनाओं के साथ दान करते रहना चाहिए।

कौन थे आचार्य चाणक्य

भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी नीतियों के बल पर एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का सम्राट बनाया जो आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुए और अखंड भारत का निर्माण किया।

चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंपत किया। चंद्रगुप्त की मदद से चाणक्य ने मगध पर आक्रमण किया और महानंद को पराजित किया।

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

Filed in: लाइफ स्टाइल

No comments yet.

Leave a Reply