6:18 pm - Wednesday September 20, 2017

छत्तीसगढ़ का नाम सूखाग्रस्त राज्यों की सूची में न होना रमन सरकार की नाकामी: कांग्रेस

vBlast News Editor Firoz Siddiqui ,9644670008

रायपुर : कांग्रेस ने कहा है कि राज्य के 21 जिले सूखे की चपेट में होने के बाद भी केंद्रीय रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ का नाम न होना यह बताता है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नजर में छत्तीसगढ़ कोई मायने नहीं रखता। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल व नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने आज जारी एक संयुक्त बयान में कहा है कि देशभर में सूखे की स्थिति पर केंद्रीय रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ का नाम न होना यह भी बताता है कि मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह न तो केंद्र के समक्ष छत्तीसगढ़ की स्थिति ठीक से रख बता पा रहे हैं न ही दमदारी से राज्य का पक्ष वहां जाहिर कर पा रहे हैं। इसी कारण ही किसानों को बोनस के मामले में भी केंद्र सरकार ने आज तक  चुप्पी साधे रखी है। इधर रमन सरकार यहां सिर्फ आगामी चुनाव मद्देनजर महज दो साल का बोनस देने जा रही है, जबकि वादा पूरे 5 साल का था।
श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार के मुताबिक 21 जिलों की 96 तहसील सूखा ग्रस्त हैं इस हिसाब से दो तिहाई से भी कम तहसील सूखाग्रस्त है। जबकि हकीकत यह है कि अन्य 6 जिलों की कई तहसीलें भी कमोबेश सूखे की चपेट में हैं। लेकिन इसके बाद भी राज्य सरकार पूरे राज्य को सूखाग्रस्त नहीं घोषित कर रही है। उधर केंद्र की रिपोर्ट से भी जाहिर है कि न केवल राज्य की रमन सरकार बल्कि केंद्र की मोदी सरकार, दोनों ही कृषि और कृषकों की उपेक्षा कर रहे हैं। इनकी नीति ही यही रहती है कि किसानों की याद इन्हें बस चुनाव के समय ही याद आती है, वादा करते हैं भूल जाते हैं, अगला चुनाव नजदीक आता है तो वादा पूरा करने की बजाय झुनझुना पकड़ा देते हैं। इधर राज्य सूखाग्रस्त है और सरकार समेत पूरी भाजपा 5000 दिन के जश्न मना रही है, किसान रो रहे हैं और ये पटाखे फोड़े जा रहे हैं। दीनदयाल जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है, कितने ही करोड़ रुपए ऐसे खर्च कर दिए जा रहे हैं। यही करोड़ों रुपए अगर सरकार किसानों के हित में और खर्च कर देती तो आज प्रदेश के अन्नदाता इतने दुखी न होते।
पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि सिर्फ दो साल का बोनस दिया जाना भी कांग्रेस के दबाव के कारण संभव हुआ है अन्यथा रमन सरकार अपनी हठधर्मिता के लिए तो किसानों की आत्महत्या को भी चुप्पी साधे देख रही थी। रमन सरकार जनता को यह बताए कि क्यों केंद्रीय रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ सूखाग्रस्त राज्यों में शामिल नहीं है जबकि देश के 17 राज्य उस सूची में शामिल है। लगातार सूखे के कारण राज्य में भू-जल स्तर भी नीचे जा रहा है, जलाशयों में पर्याप्त जलभराव नहीं है।
सिंहदेव ने कहा कि राज्य सरकार को शेष जिलों में भी कलेक्टर को आदेश देकर मुआयना करवाना चाहिए ताकि वहां के सूखा ग्रस्त किसानों की भी मदद हो सके। राज्य लगातार 2 वर्षों से सूखा झेल रहा है, पिछले वर्ष के सूखे के बाद किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला। फसल बीमा कंपनियां किसानों से प्रीमियम तो डट कर लेती हैं लेकिन जब मुआवजा देने का समय आता है तो महज 5 या दस रुपए पकड़ा देती हैं। वर्ष 2014-15 में राज्य के कुल किसानों ने करीब 17 लाख हेक्टेयर भूमि का फसल बीमा करवाया था जिस पर 7 बीमा कंपनियों को करीब साढ़े 3 अरब रुपए का प्रीमियम प्राप्त हुआ था लेकिन जब मुआवजा बांटा गया था तो किसी किसान को 5 किसी को 10 अथवा किसी को सिर्फ 25 रुपए मुआवजा दिया। इसके बाद भी राज्य सरकार खामोश रही।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ओर किसान अभी पिछले फसल की मार से उबरा नहीं है उधर उसे रबी फसल की तैयारी के लिए कहा जा रहा  है। यह तभी संभव है जब राज्य सरकार उसकी मदद करे, लेकिन सिर्फ कागजों पर नहीं।

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