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जानना हैं किसी के मन की बात तो इन इशारों को समझें

bhaiनई दिल्ली/ गाल और बाल- गाल भीतर खींच सकते हैं, फुलाए जा सकते हैं। जब गाल भीतर खिंचे हों और होंठों को दबाए रखें तो मुंह बिचकाने का संकेत यानी अस्वीकार्यता का भाव दर्शाना है। गाल फुलाकर बाहर हवा फैंकना, जबकि आंखें गोल हो जाएं और तभी भौंहें भी ऊपर तन जाएं तब लगता है- ‘अब क्या किया जाए?’

लाल गाल लज्जा के सूचक हैं, मगर यही आंखों की मुद्रा के भावों से मिलाकर देखे जाएं तो क्रोध में तमतमा उठने का लक्षण बन जाते हैं। मुंह में कुछ चबाते रहना भीतर छुपी ‘नर्वसनैस’ का संकेत देता है। गालों पर हाथ धरकर हम आश्चर्यमिश्रित चीख का प्रदर्शन भी करते हैं। बाल लहराकर आमंत्रण या आकर्षण का बिदु बनने की कोशिश मानी जाती है। बालों को बार-बार संवारना नर्वस होने का लक्षण है। खुले बाल और बंधे बाल संस्कृति के अनुरूप स्त्रियों में आमंत्रण और मर्यादा के मिश्रण का प्रतीक होते हैं।blast-news

बालों को लेकर भी आप बॉडी लैंग्वेज के अर्थ जान सकते हैं। बालों को विभिन्न शैलियों में काटा जाता है, बांधा जाता है, खुला छोड़ा जाता है, छोटा या बड़ा रखा जाता है। सुंदर दिखने की आकांक्षा में इसका भी एक बड़ा अंश है। पारम्परिक रूप से पुरुषों में बहुत सीमित शैलियां उपलब्ध हैं किन्तु स्त्रियों में ये अपरम्पार हैं। पुरुष सेना के छोटे बाल या पब के बाहर खड़े बाऊंसरों के चिकने गंजे सिर के रूप में विशेष भूमिका दर्शा सकते हैं। लम्बे बाल, उलझे बाल तथा पीछे बंधे हुए बाल पुरुषों में कुछ अलग दिखने का कारण बनते हैं। कई बार ये तकनीक कमजोर आत्म शक्ति का आवरण बन जाती है ताकि आप आकर्षक बने रहने की अतिरिक्त कोशिश को अपना हथियार बना सकें।

ठोडी पकड़ कर बैठना गले समेत सभी हिस्सों को सहारा तथा सुरक्षा देता है। सिर हल्का-सा झुक सकता है लेकिन ठोडी को यदि इस तरह सहारा दिया जाए कि वह चेहरे को थोड़ा एक तरफ घुमा दे तो आप कह सकते हैं कि आप किसी की तरफ विशेष ध्यान दे रहे हैं। अंगूठे से दबाकर, जबड़ों को भींचकर किसी को क्रोध का संकेत दिया जा सकता है। ठोडी को हल्के-हल्के से थपथपाना या पैंसिल-पैन से छूना विचार मुद्रा का संकेत है। ठोडी पर दाढ़ी के जहां सांस्कृतिक संकेत होते हैं, वहीं अधिकारपूर्ण मुद्रा को भी इससे आंका जाता है।

 

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