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ज्ञान और उमंग का अनूठा उत्सव है बसंत पंचमी

bhai बसंत पंचमी हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है हिंदुस्तान और हिंदुस्तान के बाहर रहने वाले हिंदू धर्मावलंबी बसंत पंचमी को बड़े ही उत्साह जोश उमंग के साथ धूमधाम से मनाते हैं बसंत पंचमी ज्ञान की देवी विद्यादायिनी मां सरस्वती की पूजा के लिए भी मनाया जाता है कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने तो सृष्टि की रचना तो कर दी थी लेकिन मानव और अन्य जीव जंतुओं के लिए संसार में नीरसता और उदासी का आलम छाया हुआ था यह देख कर भगवान ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल की बूंदें पृथ्वी पर बिखेरी जिससे मां सरस्वती का उद्गम हुआ।

मनोज यादव संवाददाता

मनोज यादव संवाददाता

उनके हाथों में वीणा थी। उन्होंने वीणा जैसे ही बजाया संसार में संगीत का अनुपम गुंजायमान होने लगा लोगों में वाणी और संगीत का उद्भव और विकास यहीं से प्रारंभ हुआ भाषाएं यहीं से जन्म लेना प्रारंभ की इसके अतिरिक्त बसंत पंचमी किसानों और मानव जीवन के लिए उत्साह और उमंग का संचार करता है मौसमों में बसंत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है मकर संक्रांति से ही सूर्य उत्तरायण होकर मानव जगत के लिए ऊष्मा प्रदान करता है तो बसंत पंचमी से आमों में बौर आना प्रारंभ हो जाता है और सरसों के फूल खिल कर मचलने लगते हैं भंवरो का गुंजायमान होने लगता है तितलियां उड़ने लगती हैं लोगों में उमंग जोश उत्साह का अनूठा संचार होता है जो महत्त्व विजयदशमी के दिन शूरवीरों और बहादुर सिपाहियों के लिए है वही महत्व ज्ञानियों और बुद्धिजीवियों के लिए बसंत पंचमी का है मां सरस्वती की पूजा अर्चना करने के बाद लोग अपने कार्य का प्रारंभ करते हैं

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