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निकाह के समय ही लिया जाएगा ट्रिपल तलाक को न कहने का फैसला : AIMPL

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Blast News Editor Firoz Siddiqui ,9644670008

नई दिल्ली  : उच्चतम न्यायालय की ओर से एक बार में ‘तीन तलाक’ को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिए जाने के मद्देनजर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फैसला किया है कि अब निकाह के समय ही काजियों और धर्मगुरुओं के माध्यम से वर और वधू पक्ष के बीच यह सहमति बन जाएगी कि रिश्ते को खत्म करने के लिए किसी भी सूरत में  तलाक-ए-बिद्दत (एकसाथ तीन तलाक) का सहारा नहीं लिया जाएगा।

बीते 22 अगस्त को शीर्ष अदालत ने एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। बोर्ड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक सोमवार को भोपाल में हुई, जिसमें बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करता है और तीन तलाक के खिलाफ और शरीयत को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान शुरू करेगा। बोर्ड ने इस संदर्भ में एक समिति के गठन का भी फैसला किया है।

बोर्ड के एक शीर्ष पदाधिकारी ने बताया, ‘बेहतर होगा कि निकाह के समय ही लड़का और लड़की के परिवारों में यह सहमति बन जाए कि अगर रिश्ते खत्म करने की कोई स्थिति पैदा होती है तो इसके लिए तलाक-ए-बिद्दत का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।’ सुन्नी मुसलमानों के हनफी पंथ में तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा रही है। बोर्ड का शुरू से यह मत रहा है कि तलाक-ए-बिद्दत तलाक का बेहतर तरीका नहीं है। उसने कई बार लोगों से तलाक के इस तरीके पर अमल नहीं करने की अपील की थी।

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