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प्रभावी नीतियों के कुशल क्रियान्वन से होगा किसानो की समस्यायो का निस्तारण

मनोज यादव संवाददाता

मनोज यादव संवाददाता

लखनऊ विधानभवन के सामने किसानो ने सड़को पर आलू फैलाकर उपज का वाजिब मूल्य न मिलने की शिकायत प्रदेश सरकार से की। सही रूप में देखा जाय तो किसान ही देश के अन्नदाता है उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलना न सिर्फ किसानो के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि यह सरकार की किसानो के प्रति असंवेदनशील नीतियों को उजागर करती है। कई किसान तो ऐसे है जिनकी कई एकड़ आलू की उपज कोल्डस्टोर में सड़कर बेकार हो गई कई किसान तो ऐसे रहे जिन्हें आलू आधी कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पडा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की यह सबसे बड़ी नाकामी मानी जायेगी सरकार को इस सम्बन्ध में कठोर नीति बनाकर किसानो को आलू का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए तत्पर रहने की आवश्यकता है। प्रदेश में कई ऐसे उपजाऊ क्षेत्र है जंहा पर आलू की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है और वंहा के किसान आलू की खेती पर पूरी तरह से निर्भर रहते है लेकिन सरकार की इस खेती के लिए कोई स्पष्ट नीति के अभाव में कभी किसान आधे से भी मूल्य पर बेचने को मजबूर हो जाते है तो कभी उनकी समूची आलू की उपज बर्बाद हो जाती है। blast-newsयह दुर्भाग्यपूर्ण है की किसानो की समस्यायो को उनकी आवाज को बुलंद करने के लिए आलू की बोरियो से विधानभवन की सड़को को भरना पड़ा तब कही मीडिया और सरकार में आलू की फसल के सम्बन्ध में उनकी समस्यायो का प्रकटीकरण हो सका। होना तो यह चाहिए की किसानो की समस्यायो के लिए क्षेत्रवार किसान प्रतिनिधि नियुक्त किये जाए जो किसानो की समस्यायो को सरकार के समक्ष रखकर उसके निपटारे की पुरजोर वकालत कर सके तब कही जाकर किसानो को रहत मिल सकती है अजर दुबारा यह संकट न पैदा हो की किसानो को अपंनी समस्या को बताने के लिए सड़को पर अन्न के ढेर को फेकना पड़े। प्रदेश सरकार को इस सम्बन्ध में केंद्र से मदद लेकर बेहतर नीतियों का निर्माण करने की आवश्यकता है जिससे किसान खुशहाल जीवन व्यतीत कर सके।

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