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फूलोदेवी नेताम द्वारा महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग के विषय में लिये गये प्रेसवार्ता के प्रमुख बिन्दु

vरायपुर : महिलाओं, बच्चों एवं वृद्धजनों की सुरक्षा और संर्वधन की जिम्मेदारी सरकार की है प्रदेश में महिलाओं की स्थिति बेहद दयनीय है, बच्चे कुपोषण के शिकार है। सरकार महिला सशक्तिकरण का लाख दावा करें की मातृत्व सुरक्षा एवं शिशु सुरक्षा का दर छत्तीसगढ़ में काफी कम हुआ है पर जमीनी हकीकत इसके बिलकुल विपरीत है। बच्चे समाज एवं देश के भविष्य है, लेकिन सरकार को इसकी चिंता नही है। कुपोषण से न सिर्फ बीमार हो रहे है, बल्कि बड़ी संख्या में उनकी मौते हो रही है। सरकार केवल आंकड़ा देकर समाज एवं प्रदेश को दिग्भ्रमित कर रही है। उनका निवाला छीना जा रहा है और भारी कमीशनखोरी एवं भ्रष्टाचार हो रहा है। बालगृहों, वृद्धाश्रमों  आंगनबाड़ी केन्द्रो की स्थिति खराब है। समाज की कुरीतियों और नकारात्मक सोच से लड़ने में सरकार पूरी तरह विफल है। महिलाएं एवं बच्चों पर अत्याचार बढ़ा है नवाजतन, महतारीजतन, मुख्यमंत्री अमृत योजना पूरी तरह से नाकाम हो गई है। 1 हजार 333 करोड़ के बजट एवं केन्द्रीय सहायता के बाद भी सरकार की इच्छा शक्ति प्रदेश के बेबस, वृद्ध, कुपोषित बच्चों को लेकर विफल है। छत्तीसगढ़ की जनता भाजपा सरकार के इस रवैय्या से बेहद नाखुश है। यह सरकार केवल तिहार मनाने में व्यस्त है, लोगों की परवाह इस सरकार को नहीं है।

1    जनवरी 2017 की स्थिति में कुपोषित बच्चों की संख्या 5,15,366 है।
2    प्रदेश में 8071 आंगनबाड़ी केन्द्र भवन विहिन है।
3    34365 आंगनबाड़ी केेन्द्र विद्युत विहिन है।
4    17913 आंगनबाड़ी केन्द्र शौचालय विहिन है।

1    भाजपा सरकार के कार्यकाल में महिलायें असुरक्षित है उनके विकास एवं उत्थान को लेकर योजनाएं तो बनायी जाती पर ये सभी योजनायें केवल कागजों तक ही सीमित है, यही कारण है कि आज 17000 से अधिक महिलायें छत्तीसगढ़ से मानव तस्करी के चलते गुम है। जिसको लेकर सरकार गायब बच्चियों एवं महिलाओं को ढ़ूढ़ पाने में कोई रूचि नहीं लेती है।

2    यह दुर्भाग्यजनक है कि छत्तीसगढ़ में कुपोषण की स्थिति पूर्वोत्तर राज्यों से भी बदतर है। सबसे कम कुपोषण अरूणांचल प्रदेश में है जबकि छत्तीसगढ़ का स्थान देश के उन प्रदेशों में 19 वें स्थान पर है। पोषण आहर के लिये छत्तीसगढ़ में प्रत्येक बच्चे के लिये लगभग दो हजार रूपये का प्रावधान है पर जमीनी स्तर पर कहीं इसमें अमल नहीं हो रहा है और नौनिहालों के स्वास्थ्य एवं परिवरिश के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

3    सरकार महिला सशक्तिकरण का लाख दावा करें कि मातृत्व सुरक्षा एवं शिशु सुरक्षा के दर छत्तीसगढ़ में काफी कम हुआ है पर जमीनी हकीकत इसके ठीक विपरीत है। लगभग 55 प्रतिशत बच्चें कुपोषण के शिकार है जिससें निपटने के लिये रमन सरकार की पर्याप्त इच्छा शक्ति की कमी है। बच्चे समाज एवं देश के भविष्य है लेकिन सरकार को इसके थोड़ी भी चिंता नही है। केवल बयानबाजी और वाहवाही की जा रही है। सरगुजा संभाग और बस्तर संभाग में कुपोषण और शिशुमुत्यु दर चिंता का विषय है।

4    राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के गायब होने एवं नाबालिग लड़कियों को अन्य राज्यों में डांस के बहाने ले जाकर शोषण करने के मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया है। बालोद पुलिस ने जरूर गत वर्ष 7 लड़कियों दलालों के चंगुल से छुड़ाकर लाया था और अपराधियों पर कार्यवाही की थी पर सरकार का लगातार शिकायत पर सुरक्षा देने में नाकाम है, सरकार का लगातार 14 वर्षो से नाबालिक बच्चियों के मामले में उदासीन रवैय्या बना हुआ है। वहीं महिलाओं की आबरू भी सुरक्षित नहीं है। हर दुसरे दिन एक महिला बलात्कार की शिकार हो रही है। आश्रमों और छात्रावासों तक में बच्चियां सुरक्षित नहीं है। कांकेर जिले के झलियामारी कथा छात्रावास और बालोद के आमाडुला में बच्चियां के साथ घृणित अनाचार के मामले सामने आ चुके है।

5    छत्तीसगढ़ राज्य महिला उत्पीड़न में देश में 5वें स्थान पर है। दुर्भाग्यजनक है कि प्रदेश के मुखिया इससे तनिक भी चिंतित नहीं है। राज्य का महिला आयोग भी संज्ञान नहीं लेता और चुप्पी साधा हुआ है। वहीं बाल संरक्षण आयोग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।

6    असुरक्षित प्रसव, संक्रमण, खून की कमी और पौष्टिक आहार में असंतुलन को लेकर अभियान चलाकर इस समस्या के निजात के लिये सरकारी प्रयास नाकाफी है।

7    वित्तीय वर्ष 2016-17 में इस योेजना के लिये एक हजार तीन सौ तैतीस करोड़ का बजट में प्रावधान देना स्वीकृति दी गई है, फिर भी सरकार की नाकामी जग जाहिर है।blast-news

8    कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013 बना हुआ है पर क्या सरकार इस पर कोई कार्यवाही कर रही है क्या प्रदेश में ऐसी सैकड़ो उत्पीड़न की घटनायें सार्वजनिक नहीं हुई है जिस पर कोई ठोस कार्यवाही की गयी है?

9    पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने राज्य सरकार द्वारा सखी वन स्टाॅप सेंटर प्रत्येक जिले में बनाये गये है, पर केवल देश एवं प्रदेश में इस योजना को छत्तीसगढ़ में सबसे पहले लागु किया इसकी केवल वाहवाही लूटी जा रही है। वन स्टाॅप सेंटर में पीड़ित महिलाओं को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। राज्य में शराब के कारण सबसे ज्यादा महिलाये प्रभावित है। पूर्ण शराब बंदी सरकार की क्या राय है?

10    बच्चों को स्वास्थ एवं सुरक्षित जीवन देना हम सबकी सामाजिक जिम्मेदारी है लेकिन सरकार की अक्षमता के कारण नवाजतन योजना, महतारी जतन योजना तथा मुख्यमंत्री अमृत योजना पूरी तरह से असफल साबित हो रही है। बच्चों को पोषण आहार बांटने के लिये महिला स्वःसहायता समुह के नाम पर पूरे राज्य में भाजपा के पदाधिकारियों को कार्य सौपा गया है। राज्य में अधिकारी पोषण आहार के नाम पर लूट मार में लगे है।

11    50 हजार आंगनबाड़ी केंद्रो में राज्य शासन के वजन त्यौहार मानाया था, जिसमें मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के अंर्तगत गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नवास केंद्र का लाभ दिये जाने की बात कही गयी थी, पर इसमें कोई अमली जामा नहीं पहनाया गया। अंधिकांश आंगनबाड़ी की स्थिति जर्जर है बच्चों के बैठने के लिये जगह नही है कागजों पर केन्द्र का संचालन कर धन उगाही का केन्द्र बना दिया है।

1    जनवरी 2017 की स्थिति में कुपोषित बच्चों की संख्या 5,15,366 है।
2    प्रदेश में 8071 आंगनबाड़ी केन्द्र भवन विहिन है।
3    34365 आंगनबाड़ी केेन्द्र विद्युत विहिन है।
4    17913 आंगनबाड़ी केन्द्र शौचालय विहिन है।

12    राज्य के आंगनबाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण के लिये 460 करोड़ का प्रावधान है। 19707 स्व. सहायता समुहों को 24.68 लाख हितग्राही को नाश्ता और गर्म पके भोजन पूरक पोषण आहार के तहत प्रदान करने की जिम्मेदारी है। इतनी राशि के खर्च के बावजूद कुपोषण का खत्म नहीं होना आश्र्चय जनक है।

13    नवा बिहान योजना हेतु 458.60 लाख का बजट रखा गया है। योजना के अंतर्गत विधिक सलाह, परामर्श केंद्र चिकित्सा, परिवहन सुविधा तथा आश्रय सुविधा प्रदान करने का प्रावधान है। जिसमें कोई ठोस कार्य नहीं किया जा रहा है।
समाज कल्याण

1    छत्तीसगढ़ को हांलाकि दिव्यांगो को सर्वश्रेष्ठ सुविधायें प्रदान करने में अ्रग्रणी होने के नाम पर राष्ट्रपति द्वारा पुरूस्कार से नवाजा गया है पर वास्तविकता इसके विपरित है। छत्तीसगढ़ में दिव्यांगो कही भी भीख मांगते एवं धक्का खाते देखे जा सकते है।

2    छत्तीसगढ़ में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिये 50 और 100 बिस्तरों के 12 छात्रावासों के निर्माण की क्या स्थिति है? क्या सभी सरकारी गैर सरकारी भवनों को बाधारहित दिव्यांगो के आवागमन को तैयार किया जा चुका है। जबकि इसके लिये केंद्र ने सहायता प्रदान की है दिव्यांगो के लिये कौशल उन्नयन प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गति धीमी क्यो है?

3    वर्ष 2012 से वरिष्ठ नागरिकों को पात्रतानुसार राज्य के बाहर निःशुल्क तीर्थयात्रा “छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना” के तहत करायी जा रही है। जिसमें भारी कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार किया जा रही है। तीर्थयात्रायों की सहुलियत देने के नाम पर भ्रष्टाचार होता है। दलाल इस कार्य में सक्रिय है। लाना ले जाना रूकाना खानपान सभी कार्य दलालों के जिम्में है।

4    छत्तीसगढ़ में वृद्धाश्रमों की स्थिति दयनीय है सभी सुविधाओं को समाज कल्याण विभाग डकार लेता है मामूली सुविधा से बूढ़े लोग (वृद्धजन) किसी तरह जी रहे है। कुल 21 वृद्धाआश्रम यहां संचालित है जिसमें दो संस्था को केन्द्रीय अनुदान मिलता है। 13 वृद्धाश्रम राज्य अनुदान से संचालित है जबकि सरगुजा का वृद्धाश्रम निराश्रित निधि से संचालित है। वहीं 5 वृद्धाश्रम संस्था स्वंय के खर्च पर संचालित हो रही है। इन आश्रमों में न पारिवारिक वातावरण है न चिकित्सा, मनोरंजन बेहतर वस्त्र सहित बिस्तर एवं भोजन का उचित प्रबंध है।

5    महिला बाल विकास विभाग द्वारा चलायी जा रही सुपोषण योजना की विफलता के कारण कुपोषण से प्रभावित बच्चों में टी.बी. का जानलेवा प्रकोप बढ़ा है। सरकार करोड़ो रूपये खर्च कर आंगनबाड़ी के जरिये जच्चा और बच्चा को पोषित आहार प्रदान करने का बड़े पैमाने पर कार्यक्रम चलाती है।

6    प्रदेश में महिलाओं तथा बच्चों के विरूद्ध अपराध की दर अन्य राज्य की तुलना में बहुत अधिक है। अधिकांश मामलो में विभाग तथा पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती।

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