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बचपन की दुनिया में वयस्कता का बदरंग चेहरा

मनोज यादव संवाददाता

मनोज यादव संवाददाता

बुधवार को लखनऊ के एक नामी गिरामी स्कूल के परिसर में बने टायलेट रूम में कक्षा 6 की एक छात्रा ने कक्षा 1 के एक मासूम की मुह में कपड़ा ठूसकर मारने की कोशिश की। मासूम खुदकिस्मत रहा की उसे तत्काल अस्पताल पहुचाया गया और इलाज के बाद डाक्टरों ने उसे खतरे से बाहर बताया इससे पहले दिल्ली तथा नोएडा में हुई बच्चों की वारदातें पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है नोएडा में तो एक स्कूल के बच्चे ने अपनी मां को ही चाकू से मार कर घायल कर  मार दिया। कई ऐसी घटनाएं घटित हो रही है जब हमें पता चलता है की बचपन के इन फरिश्तों को बड़े हत्यारे बन चुके हैं बच्चों के बाल मन पर सबसे ज्यादा असर टेलीविजन और मोबाइल तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पड़ रहा है धरती पर जन्म लेने के बाद बच्चों का मन और मस्तिष्क पूरी धरा शून्य और कोरा होता है उस पर समाज और परिवार की जिम्मेदारी होती है कि वह किस प्रकार कारण रंग चढ़ाना चाहते हैं लेकिन आज की भागमभाग भरी जिंदगी में जहां अभिभावक बच्चों पर अपना मुकम्मल दायित्व का निर्वहन कर पाने में असमर्थ नजर आ रहे हैं वही बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों इंटरनेट पर पसरे हुए तमाम गतिविधियों  से तथा प्रत्येक घर में टेलीविजन और  मोबाइल  और लैपटॉप के बेजा इस्तेमाल से परिवार तथा समाज में फैली हुई तमाम विसंगतियां पैदा हो रही है ये  ऐसे तमाम कारक हैं जो बच्चों के बाल मन पर गहरा असर डाल रहे हैं और मासूम कहे जाने वाले बच्चों पर वयस्कता का रंग चढ़ता नजर आ रहा है ये मासूम कहे जाने वाले बच्चे भी उसी प्रकार से क्रियाकलाप करना चाहते हैं जिस प्रकार से उन्हें समाज दिखा रहा हैblast-news समाज और परिवार अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर जिस पथ पर आगे बढ़ रहा है उसी को ये मासूम बच्चे अख्तियार कर रहे हैं जिससे जीवन की सबसे अनमोल उम्र के पड़ाव बचपन की  झोली से खुशिया पलायन करती नजर आ रही हैं और कम उम्र में ही ऐसा कार्य करने पर विवश हो रहे हैं जो नहीं करना चाहिए एकल परिवार की बढ़ती प्रवृति और संयुक्त परिवार का लगातार होता ह्रास जिसमें दादा दादी नाना नानी की कहानियां से बच्चे दूर होकर टेलीविजन के आधुनिक दौर में पहुंच गए हैं जहां पर अश्लीलता हत्या रेप और जल्द और गलत तरीके से महत्वकांक्षी बनने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है अगर जल्द ही सरकारें और समाज के प्रबुद्ध वर्ग इस दिशा में सजग होकर बड़ी पहल नहीं करते हैं तो आने वाला समय निश्चित रूप से बहुत ही अंधकार में होगा

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