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भाजपा ने स्वामी विवेकानंद जी के सिद्धान्तो की अवहेलना, युवाओं से किया विश्वासघात : कांग्रेस

bhaiरायपुर। युवाओ के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की जयंती अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने उन्हें स्मरण करते हुए युवा दिवस की बधाइयाँ देते हुए रमन सरकार और भाजपा पर प्रदेश के युवाओ से विस्व्सघात करने का आरोप लगाते हुए तीखा प्रहार किया है।

तिवारी ने कहा कि, राज्य में 19 लाख से अधिक बेरोजगार युवकों की एक बड़ी फौज तैयार हो चुकी है। इस अदूरदर्शी सरकार के राज में रोजगार प्राप्त करने की सारी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी है। हताशा और निराशा कब आक्रोश में तब्दील हो जाये, कहा नहीं जा सकता। लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट की धज्जियां उड़ाते हुए राज्य में छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगाकर लोकतंत्र को कमजोर करने में कोई कसर बाकी न छोड़ने वाली इस रमन सरकार से राज्य के युवाओं की सभी प्रकार की उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी है। स्थानीय युवाओं की उपेक्षा कर आउट सोर्सिंग के माध्यम से अन्य राज्य के लोगों की भर्ती में उतावली भाजपा सरकार के मुख से राज्य के युवाओं के बारे में किसी भी प्रकार से बाते करना बिल्कुल शोभा नहीं देता है।blast-news

14 वर्ष में सरकार की युवा एवं खेल नीति नहीं बन पायी है। अब जाकर खेल नीति 2017 तैयार की गयी है पर खेलों में छत्तीसगढ़ राज्य को अग्रणी राज्य की श्रेणी में लाने के लक्ष्य को लेकर खेल अनुकूलित वातावरण का निर्माण नहीं किया जा सका है। गांव-गांव में खेल प्रतिभायें हैं परंतु अवसर नहीं मिल रहे है। अपने दम पर और खर्च पर कोई युवा यदि बड़ी उपलब्धि प्राप्त करता है तो सरकार उसे सरकारी नौकरी भी नहीं देती। खेल अधोसरंचना एवं संसाधनों की कमी सरकार की खेल के प्रति गंभीर नहीं होने को दर्शाता है।आधारभूत खेल अधोसंरचना के लिये सरकार ने 45 लाख रू. प्रति स्टेडियम बनाने के हिसाब से 22 मिनी स्टेडियम का प्रावधान किया गया है, परंतु बस्तर के ब्लाक मुख्यालय में आज तक कोई मिनी स्टेडियम का निर्माण नहीं किया गया है, इसी प्रकार रायपुर कोटा स्टेडियम में 16.41 करोड़ की स्वीकृति के बाद भी खिलाड़ियों के लिये सिंथेटिक ऐथेटिक बनाने का कार्य नहीं हुआ है, जिससे खिलाड़ियों को असुविधा हो रही है।

राज्य के सबसे बड़े अम्बेडकर अस्पताल में मात्र 62 पदों के लिए 15,000 से अधिक शिक्षित बेरोजगार युवाओं की भीड़ 14 वर्ष के भाजपा सरकार के लँगड़े विकास का आईना है। राजधानी के अम्बेडकर अस्पताल में लगी युवाओं की लंबी कतारें भाजपा सरकार के विकास के दावों की पोल खोल रही थी। राज्य बने डेढ़ दशक पूरे होने को है, आज भी सरकार की प्राथमिकता में युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाना है ही नही। भाजपा सरकार रिटायर अधिकारियों के पुनर्वास का केंद्र बन चुकी है, अधिकारी रिटायर हुए नही तुरन्त उनकी संविदा नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए जाते है भले ही उनके खिलाफ कितनी भी शिकायत हो जांच हो। आज तक सरकार ने सरकारी सेवाओं में भर्ती का कोई अभियान नही चलाया। पीएससी की भी परीक्षा नियमित हर वर्ष नही होती। व्यवसायिक परीक्षा मण्डल तो पहले ही अपनी विश्वसनियता खो चुकी है। प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में 19 लाख से अधिक युवाओं ने रोजगार मिलने की प्रत्याशा में पंजीयन करवा कर रखा है दुर्भाग्यजनक है कि रोजगार कार्यालय के माध्यम से सरकारी नौकरिया देने में भाजपा सरकार फिसड्डी साबित हुई। पंजीकृत युवाओं में औसतन .02 फीसदी लोग भी रोजगार कार्यालय के माध्यम से शासकीय सेवा में नही जा पाए है। सरकार प्रायोजित रोजगार मेले में निजी क्षेत्र में भी राज्य के युवाओं के लिए चपरासी प्लम्बर, राजमिस्त्र, कारपेंटर जैसे पद ही ऑफर किये जाते है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब कौशल विकास उन्नयन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से किया था तब ऐसा लगा था शायद अब राज्य के युवाओं को रोजगार मिलेगा, लेकिन यह योजना भी कागजी और बेरोजगार युवाओं मुंह चिढ़ाने वाली साबित हुई। प्रदेश के निजी क्षेत्र के उद्योगों में स्थानीय युवा सिर्फ लेबर और चतुर्थ वर्ग का रोजगार ही पाते हैं।

प्रदेश में छात्रसंघों की चुनाव को समाप्त कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पहली सीढ़ी को ही समाप्त कर दिया गया है। छात्रसंघों के चुनाव से ही देश को युवा लोकतंत्र की राह पर चलाने की प्रेरणा लेते है जिसे सरकार ने रोक दिया है।

 

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