6:17 pm - Wednesday September 20, 2017

महँगाई की मार से जनता हुई त्रस्त और बेपरवाह भाजपा सरकार है मस्त : कांग्रेस

gyanesh-sharma-media-chairmanरायपुर: केंद्र में भाजपा की सरकार को बने 3 साल से ज्यादा का समय हो चुका है और इस दौरान पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल के दाम पर पूर्व की यूपीए की सरकार को लगातार कोसने वाली भाजपा, केंद्र में अपनी सरकार रहते हुए भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर लगाम नहीं लगा पायी। ऊपर से इसके दाम लगातार बढ़ाकर जनता की जेब पर बोझ डालती रही।
इस शनिवार को पेट्रोल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा किया गया। दिल्ली में दाम बढ़कर 70.38 रुपए प्रति लीटर हो गए, जो पिछले 8 महीनों में सबसे अधिक है। वहीं मुंबई में पेट्रोल की कीमत 79.14 रुपए प्रति लीटर रहे, जो अगस्त 2014 के बाद सबसे अधिक है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतें ग्लोबल बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर निर्भर करती हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में करीब 3.25 फीसदी की गिरावट आयी थी, बावजूद इसके कीमतें बढ़ाई गई।
डायनैमिक प्राइसिंग से नुकसान-
केंद्र सरकार ने जून महीने से डायनैमिक प्राइसिंग मेथड अपनाया था। उस वक्त पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि इससे लोगों को फायदा होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, बल्कि पिछले ढाई महीनों में पेट्रोल में करीब 7 रुपए और डीजल में 5 रुपए प्रति लीटर का इजाफा हो गया है।
पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में बढ़ोतरी के कारण रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सरकार को चाहिए था कि पेट्रोल और डीजल दोनों को जीएसटी के अंतर्गत लाती, परन्तु आम जनता की हितों की चिंता किये बिना सरकारी खजाना भरने के चक्कर में  सरकार ने इन दोनों को जीएसटी से बाहर रखा। पहले ही नोटबंदी की मार झेल रही जनता,अब डीजल एवं पेट्रोल के दाम में हो रही बेतहासा वृद्धि से बदहाल हो गयी है। सरकार के इस कदम से जनता अपने को एक बार फिर से ठगा हुआ महसूस कर रही है।
भाजपा, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मिथ्या प्रचार करके सत्ता में आई थी और विगत 3 सालों में एक भी वादा पूरा नहीं कर पायी।
कांग्रेस पार्टी ये मांग करती है कि सरकार पेट्रोल और डीजल की बढ़े हुए दामों को कम करने के व्यापक कदम उठाए, अन्यथा आने वाले विधानसभा चुनावों में जनता उन्हें इस बात का उचित जवाब देगी।

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