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संसदीय सचिवों के मामले में भाजपा का दोहरा चरित्र उजागर

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रायपुर/संसदीय सचिव मामले में भाजपा पर हमला बोलते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने मुख्यमंन्त्री रमन सिंह से पूछा कि दिल्ली के विधायकों को संसदीय सचिव का पद धारित कर लाभ लेने के कारण   मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अयोग्य ठहराए जाने  के फैसले को वे सही मानते है या गलत ? देश और छत्तीसगढ़ की जनता भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व  से भी जानना चाहती है छत्तीसगढ़ और दिल्ली के मामले में वह दोहरा मापदंड क्यो अपना रही है ? दिल्ली में संदीय सचिवो का पद लाभ का है उनको मिलने वाली सुविधाएं  जनता के ऊपर अतिरिक्त बोझ है फिर छत्तीसगढ़ में समान पद भारतीय जनता पार्टी की नजर में लाभ का पद क्यो नही है?सिर्फ इसलिए कि यहां संसदीय सचिव के रूप में उनके दल के विधायक उपकृत हो  रहे है । नैतिकता और कानून का मापदण्ड सारे देश मे एक होने चाहिए ।दिल्ली के समान छत्तीसगढ़ में भी 11 संसदीय सचिवो को न सिर्फ बर्खास्त किया जाय उनकी विधानसभा की सदस्यता भी समाप्त की जानी चाहिए । संसदीय सचिवों को अयोग्य किये जाने पर भाजपा सरकार सरकार अल्पमत में आ जायेगी। भाजपा सरकार ने अपनी पूरी प्रशासनिक और राजनैतिक ताकत इसे नहीं होने देने में लगा रखी है। यही ताकत यदि नियमों का पालन करने और संविधान का उल्लंघन नहीं होने देने में भाजपा ने लगाई होती तो आज 11 संसदीय सचिवों का निर्वाचन अवैध होने की नौबत ही नहीं आती।

संसदीय सचिव मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अकबर ने उच्च न्यायालय में याचिका लगाई हुई है। इसके साथ-साथ राज्यपाल को भी इस मामले में आवेदन दिया गया था। अगर छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिवों के मामले में दिया गया आवेदन चुनाव आयोग को भेज दिया गया होता तो चुनाव आयोग में दिल्ली से पहले छत्तीसगढ़ का फैसला आ जाता। अगर छत्तीसगढ़ में 11 संसदीय सचिव अयोग्य कर दिए जाते तो आज भाजपा सरकार अल्पमत में होती। रमन सिंह की सरकार गिर गई होती। इन 11 संसदीय सचिव को बचाने के लिए रमन सिंह सरकार ने पूरी प्रशासनिक, राजनीतिक ताकत झोंक दी है जबकि दिल्ली की तुलना में छत्तीसगढ़ का मामला ज्यादा संगीन है और छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिव का पद लाभ का पद ज्यादा है। संवैधानिक प्रावधानों छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार इस मामले में उल्लंघन की है। blast-news

एक देश, एक संविधान एक विधान एक प्रावधान, एक कानून अगर दिल्ली के संसदीय सचिव अयोग्य हैं तो छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिव अयोग्य क्यों नहीं है? दिल्ली में तो हमने भी आप के विरुद्ध चुनाव लड़ा था, भाजपा ने भी चुनाव लड़ा था लेकिन दिल्ली में चुनाव आयोग से फैसला संसदीय सचिवों के खिलाफ आ जाता है और छत्तीसगढ़ में सभी संबंधित फोरम में आवश्यक पहल और आवेदन करने के बावजूद संसदीय सचिवों के मामले में फैसला क्यों नहीं आ रहा है यह बहुत बड़ा सवाल है।

मंत्रिमंडल को सदन की सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित रखने का एक प्रमुख कारण मंत्रालय को सौदालय बनने से रोकना था। दिल्ली के संसदीय सचिवों को लेकर चुनाव आयोग के निर्णय से इसकी  पुष्टि हो गयी है। अन्य कुछ राज्यों की ही तरह छत्तीसगढ़ की रमनसिंह सरकार द्वारा अपने लोगों  को उपकृत करने के मामले में सबको फैसले का इंतजार है।

 

 

 

 

 

 

 

Filed in: छत्तीसगढ़, टॉप 10, पॉलिटिक्स

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