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सकट चौथ 2018 : जानिए सबसे पहले धर्मराज युधिष्ठिर ने रखा था यह व्रत,ऐसे करें पूजा

blast-newsभगवान श्रीगणेश को चतुर्थी का व्रत अत्यंत प्रिय है। चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ और चतुर्थी तिथि के दिन ही भगवान कार्तिकेय के साथ पृथ्वी की परिक्रमा की प्रतियोगिता में उन्होंने पृथ्वी की बजाय अपने माता पिता भगवान शिव और माता पार्वती की सात बार परिक्रमा की। तब शिवजी ने प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूजा का अधिकार दिया था। माघ माह में कृष्ण पक्ष चतुर्थी को संकट चतुर्थी के रूप में जाना जाता है।

पुराणों में संकट चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत को वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ या तिलकुटा चौथ व्रत भी कहा जाता है। भगवान श्रीगणेश की पूजा मात्र से ही समस्त देवी-देवता प्रसन्न हो जाते हैं। पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत को स्वयं भगवान श्रीगणेश ने मां पार्वती को बताया था। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर धर्मराज युधिष्ठिर ने सबसे पहले इस व्रत को रखा था।

संतान के कष्टों को दूर करने के लिए संकट चतुर्थी पर भगवान श्रीगणेश और माता पार्वती की पूजा की जाती है। माताएं अपनी संतान के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन तिल दान करने का विशेष महत्व है। इस व्रत के प्रभाव से संतान को रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीगणेश के पूजन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें। चंद्र देव से घर-परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

blast-newsसकट चौथ की पूजन विधि

पूजा के दौरान इस श्‍लोक से गणेश जी की वंदना करने से वे अत्‍यंत प्रसन्‍न होते हैं।

गजाननं भूत गणादि सेवितं,कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्,

उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्

व्रत में पूरे दिन मन में श्री गणेश जी के नाम का जप करें और सूर्यास्त के बाद स्नान कर के साफ वस्‍त्र पहन कर विधिपूर्वक गणेश जी का पूजन करें। इसके लिए एक कलश में जल भर कर रखें, धूप-दीप अर्पित करें, नैवेद्य के रूप में तिल और गुड़ के बने हुए लड्डू, ईख, शकरकंद, अमरूद, गुड़ और घी अर्पित करें। इसके बाद चंद्रमा को कलश से अर्घ्य अर्पित करके, धूप-दीप दिखायें और एकाग्रचित होकर सकट की कथा सुनें और सुनायें।

तिल का है महत्‍व

कहते हैं की सकट के व्रत में तिल का प्रयोग अवश्‍य करें अलग अलग राज्यों मे विभिन्‍न प्रकार के तिल और गुड़ के लड्डू बनाये जाते हैं। तिल के लड्डू बनाने के लिए तिल को भूनकर, गुड़ की चाशनी में मिलाया जाता है और गुड़ के साथ कूट कर तिलकूट बनाया जाता है। कुछ स्‍थानों पर तिलकूट का बकरा भी बनाते हैं उसकी गर्दन घर का कोई बच्चा काटता है।

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