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सरकार की असंवेदनशीलता के चलते शुद्ध पेयजल के नाम पर जहर पिलाया जा रहा है : कांग्रेस

3-copyरायपुर: प्रदेश की राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर चांपा, धमतरी, महासमंुद, गरियाबंद, और अन्य जिलों में लगातार अशुद्ध पेयजल की सप्लाई से राज्य सरकार द्वारा जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।123
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने पेयजल मामले में रमन सरकार की संवेदनहीनता पर आरोप लगाते हुये कहा है कि, जो सरकार राज्य में 14 वर्षो से सत्ताशीन होने के बावजूद जनता को शुद्ध पेयजल मुहैय्या न कर सके इससे शर्मनाक क्या हो सकता है। रायपुर से लेकर अन्य निकायो के जनप्रतिनिधियों द्वारा नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल को लगातार समस्या से अवगत कराते रहे है, परन्तु जनहीत के कार्यो पर विभागिय मंत्री से लेकर अधिकारी आंख पर पट्टी बांधे बैठे है और अब राज्य के सर्वोच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने 15 दिनों में रिपोर्ट मांग कर जिम्मेदार लोगो फटकार लगायी है, दूषित पेयजल से अनेको बीमारियां जन्म लेती है, पीलिया, डायरियां, ईकोली बैक्टीरिया, जैसी जो जानलेवा होती है।
तिवारी ने कहा कि जलकर वसूली के नाम पर शहरी क्षेत्रो में जनता की गाढ़ी कमाई पर प्रशासन कोई कोताही नहीं बरतती। बीते वर्षो में जलकर 720 रू. प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 2400 रू. कर दिया गया है। अकेले राजधानी रायपुर में क्लोरीन सिलेण्डर के नाम पर 22 लाख रू. प्रतिवर्ष खर्च होता है। शासकीय खातो में करोड़ो का खर्च प्रतिवर्ष दर्शाया जाता है तो आखिर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था क्यों नही की जा रही है। गंरियाबंद के सुपेबेड़ा में अब तक पिछले कुछ वर्षो में 100 से अधिक लोगों की अशुद्ध पेयजल के चलते किडनी खराब होने से मौत हो चुकी है, कईयों का तो पुरा परिवार मौत के गाल में समा चुका है। अशुद्ध पेयजल के चलते जनता को जहर पिलाया जा रहा है सरकार को चाहिये की जनता की मानवीय आवश्यकता शुद्ध पेयजल की समस्या का निराकरण जल्द से जल्द करनी चाहिये।1

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