10:42 pm - Monday November 20, 2017

सरकार की नाकामी से छग में बिजली संकट गहराया : कांग्रेस

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Blast News Editor Firoz Siddiqui ,9644670008

रायपुर : प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का पहला राज्य था जो विद्युत कटौती से मुक्त राज्य के रूप में वर्ष 2008 में उभरा था और यह राज्य जीरो पावर कट होने वाले प्रदेश के तौर पर जाना जाता था, पर पावर वितरण और विद्युत संयंत्रों में उत्पादन की नाकामी ने पूरी व्यवस्था को ठप्प कर दिया है। पूरा विभाग कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का पर्याय बनता जा रहा है। यही कारण है कि बिजली की मांग की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही है। विद्युत मंडल लाख दावा करे कि बिजली की डिमांड ने ग्रीष्म ऋतु का रिकार्ड तोड़ दिया है और संकट के दौर में विद्युत कटौती जैसी स्थिति नहीं है पर वास्तविकता यही है कि छ.ग. में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। उद्योग धंधे अघोषित विद्युत कटौती के कारण बंद होने के कगार पर है वहीं किसान भी फसलों को बचाने के लिए पावर कटौती से त्रस्त हैं। राज्य सरकार की मंशा से लगता है उन्हें न उद्योग धंधों की कोई चिंता है और ना ही किसानों के भविष्य को लेकर विद्युत कटौती के प्रति कोई कारगर कदम उठाया जा रहा है।
प्रवक्ता मो. असलम ने कहा है कि वर्ष 2016 में भारत सरकार की ‘उदय योजना‘ का छत्तीसगढ़ के केबिनेट द्वारा अनुमोदन किया गया है, जिसमें इस यह उल्लेख है कि इस योजना के लागू किये जाने से अधिक बिजली का उत्पादन कम लागत मूल्य पर किया जा सकेगा, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत 3150 करोड़ के व्यय को मंजूरी मिली थी, जिसमें अधोसंरचना के विकास कार्यों को पूर्ण करने का निर्णय लिया गया था। सरकार ने तो यह भी बताया था कि अविद्युतीकृत गांवों एवं अपहुंच वाली आबादी तक बिजली पहुंचाई जायेगी। पर कहीं भी इस योजना का लाभ छत्तीसगढ़ के लोगों को मिलता नजर नहीं आ रहा है। वहीं विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए हेल्प लाईन नं. 1912 एवं केन्द्रीयकृत विद्युत काल सेंटर के संचालन की व्यवस्था केवल कार्यालयों में कागजों तक सीमित है, उपभोक्ताओं को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। कांग्रेस ने बाधा रहित विद्युत आपूर्ति की मांग करते हुए कहा है कि ऊर्जा मंत्रालय स्वयं प्रदेश के मुखिया के अधीन है फिर भी पावर वितरण और उत्पादन की कमी से प्रदेश के किसानों और उद्योगों के सामने विद्युत संकट की परेशानी बनी हुई है। शार्ट टर्म बिजली खरीदने के प्रस्ताव पर भी कोई अमल नही हो रहा है और ना ही सरकार द्वारा कोई समाधान निकाला जा रहा है जो किसानों एवं उद्योगों के प्रति संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

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