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PM मोदी बोले-क्‍या खाना क्‍या नहीं खाना हमारी परंपरा का हिस्‍सा नहीं,ये हमारी व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा

2Blast News Editor Firoz Siddiqui ,9644670008

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद द्वारा 11 सितंबर, 1893 को शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में दि गए ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगाठ पर दिल्ली के विज्ञान भवन में युवाओं को संबोधित किया। गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद ने आज के ही दिन 125 साल पहले अमेरिका के शिकागो में अपने ऐतिहासिक भाषण से पूरी दुनिया में नया रास्ता दिखाया था। कार्यक्रम में मौजूद छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं कालेज में छात्रों द्वारा मनाए जाने वाले   रोज डे का विरोधी नहीं हूं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि हमें रोबोट नहीं बनाने हैं बल्कि रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देना है।’

समारोह में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘कालेजों में कई तरह के डे मनाये जाते हैं। आज रोज डे है, कल कुछ और डे है। कुछ लोगों के विचार इसके विरोधी हैं और ऐसे कुछ लोग यहां भी बैठे होंगे। लेकिन मैं इसका विरोधी नहीं हूं। मोदी ने कहा कि हमें रोबोट तैयार नहीं करने हैं, रचनात्मक प्रतिभा को आगे बढ़ाना है। इसके लिए विश्वविद्यालय के कैम्पस से अधिक अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती है।

1. आज 9/11 है, 2001 के बाद इस दिन के बारे में काफी चर्चा होती है लेकिन 1893 का भी एक 9/11 है, जिसे हम याद रखते हैं।

2. जब मैं यहां आया तो सब लोग वंदे मातरम् का नारा लगा रहे थे…मैं पूरे देश से पूछना चाहता हूं कि क्‍या हमको वंदे मातरम् कहने का हक है?

 3. मुझे इस संदर्भ में उनका विशेष रूप से जिक्र करना है जो अथक रूप से स्‍वच्‍छ भारत अभियान में लगे हैं? क्‍या हम उनमें से हैं जो पान खाने के बाद पीच मारते हैं और कहते हैं वंदे मातरम? केवल उनको ही वंदे मातरम् कहने का हक है जो देश को स्‍वच्‍छ रखने का काम करते हैं?

4. कभी मैंने बोला था पहले शौचालय फि‍र देवालय तब मेरे बाल खींचे गए।

5. हर आदमी अपने प्रियजनों की अस्थियां गंगा में बहाने की सोचता है, लेकिन क्‍या हम देश को स्‍वच्‍छ रखने की बात सोचते हैं?

6. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश की हरित क्रांति के लिए स्‍वामी विवेकानंद जिम्‍मेदार हैं। विवेकानंद से पहले हमको सपेरों का देश कहा जाता था।

7. हम ऐतिहासिक विरासत की संताने हैं। यहां के हर आदमी ने कुछ न कुछ जरूर दिया है। यहां तक कि भिखारी भी चाहें आप उसे कुछ दें या न दें लेकिन आपको आशीष देता है।

8. क्‍या खाना क्‍या नहीं खाना हमारी परंपरा का हिस्‍सा नहीं है, ये हमारी व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा है।

9. कभी-कभी सफलता की राह में असफलता बाधा बनकर आती है। जो नदी के किनारे खड़ा रहता है, वह कभी नहीं डूबता। लेकिन जो नदी में कूदकर उसको पार करता है, वही सफल होता है।

10. स्‍वामी विवेकानंद ने ‘वन एशिया’ का नारा दिया। उन्‍होंने कहा था कि दुनिया की समस्‍याओं का समाधान एशिया से निकलेगा।

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